ज़िंदगी में हिसाब
रिश्तों की दुनिया में लोग आपकी मजबूरियाँ नहीं, आपकी मौजूदगी याद रखते हैं। यह संवेदनशील कहानी बताती है कि दुःख की घड़ी में साथ खड़ा होना ही रिश्तों का सबसे बड़ा निवेश है।

रिश्तों की दुनिया में लोग आपकी मजबूरियाँ नहीं, आपकी मौजूदगी याद रखते हैं। यह संवेदनशील कहानी बताती है कि दुःख की घड़ी में साथ खड़ा होना ही रिश्तों का सबसे बड़ा निवेश है।
“माँ दुर्गा” एक भावपूर्ण भक्ति कविता है, जिसमें माँ अम्बे के नौ स्वरूपों का स्मरण करते हुए विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश की कामना की गई है। यह रचना श्रद्धा और समर्पण का सुंदर उदाहरण है।
एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।
“नारी की गरिमा” कविता स्त्री के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के मुद्दों पर समाज से तीखे प्रश्न करती है। यह रचना महिलाओं के प्रति भेदभाव, अपराध और सामाजिक विसंगतियों को उजागर करते हुए आत्मसम्मान और समानता की आवाज़ बुलंद करती है।
विश्व हिंदी प्रचारिणी महासभा और यूनिक यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा इंदौर में आयोजित साहित्यिक समारोह में कवयित्री पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को उनके साहित्यिक योगदान और काव्य प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।
राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं
कभी-कभी मोहब्बत दूरियों में भी सांस लेती है। यह ग़ज़ल उसी ख़ामोश प्रेम, अधूरी चाहत और दिल में ठहरी ख़लिश की कहानी कहती है।
स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।