भीड़भाड़ वाले भारतीय शहर के बाज़ार में ट्रैफिक जाम के बीच खड़ी एक महिला मुस्कुराते हुए अपने आसपास की चहल-पहल को देख रही है। सड़क पर वाहन, दुकानदार, राहगीर और बाजार की हलचल दिखाई दे रही है, जो अपने शहर के प्रति अपनापन, जीवंतता और जीवन के उत्साह को दर्शाती है।

खोया हुआ शहर

विदेश की सुव्यवस्थित और मशीनी जिंदगी छोड़कर अपने शहर की भीड़, जाम, बिजली कटौती और जीवंत हलचल में लौटने वाली एक महिला की कहानी। यह कथा बताती है कि जीवन केवल सुविधाओं का नाम नहीं, बल्कि उन धड़कनों का भी नाम है जो हमें अपनेपन का एहसास कराती हैं।

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धुंधले सांध्य वातावरण में एक भारतीय महिला अकेली खड़ी है। उसके पास दलदल में खिला एक कमल दिखाई दे रहा है, जो देह और आत्मा के संघर्ष का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में चट्टानें, बहता जल और धुंध आत्मबोध, तन्हाई और अस्तित्व की गहन यात्रा को दर्शा रहे हैं।

प्राण प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा” एक गहन प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें देह, आत्मा, यथार्थ और तन्हाई के बीच संघर्ष को सशक्त बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना मनुष्य के अस्तित्व, आत्मबोध और भीतर सुलगती मौन पीड़ा की मार्मिक पड़ताल करती है।

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सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

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नीले आकाश, हरे-भरे जंगलों, पर्वतों, नदी और झरनों से सजा प्राकृतिक दृश्य, जहाँ एक व्यक्ति पौधा लगा रहा है। आसपास पक्षी और वन्यजीव दिखाई दे रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और धरती माता की सुंदरता का संदेश दे रहे हैं।

नीला अम्बर, स्वच्छ पवन

“नीला अम्बर, स्वच्छ पवन है” कविता प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और धरती माता के प्रति मानव के कर्तव्यों को दर्शाती है। यह रचना पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।

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पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो

मन्नत का धागा

“पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो…” प्रेम, इंतज़ार, तन्हाई और अधूरी चाहत की पीड़ा को व्यक्त करती यह कविता दिल की गहराइयों को छू जाती है। मन्नत के धागे से शुरू होकर प्रेम के दर्द तक की भावनात्मक यात्रा का मार्मिक चित्रण।

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नारी केवल शब्द नहीं, मानवता की पहचान है |

नारी

नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि ममता, त्याग, साहस, धैर्य और मानवता की पहचान है। यह कविता नारी के विविध रूपों और उसके अमूल्य योगदान को समर्पित है।

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गौरेया और उसके बच्चों की भावुक कहानी

मेरे घर आई एक नन्ही परी

रसोई के रोशनदान में बसे एक गौरेया जोड़े के घोंसले से निकली एक नन्ही-सी जान लेखक के जीवन का भावनात्मक हिस्सा बन जाती है। अंडे से निकलने, पंख उगने और पहली बार खुले आसमान में उड़ान भरने तक की उसकी यात्रा लेखक को अपने बच्चों के बचपन और जीवन के गहरे सत्य की याद दिलाती है। प्रकृति, मातृत्व, स्नेह और बिछड़ने की मधुर पीड़ा से सजी यह कहानी बताती है कि प्रेम का सबसे सुंदर रूप किसी को अपने पास बांधकर रखना नहीं, बल्कि उसे उड़ने की आज़ादी देना है।

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रात के समय अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर बैठी एक वृद्ध भारतीय माँ, अकेलेपन और मातृत्व के गहरे भावों को दर्शाती हुई।

एकांत का शोर

“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।

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बरामदे के झूले पर बैठी एक भारतीय महिला बारिश के बीच मोबाइल संदेश पढ़ते हुए मुस्कुराती हुई, अनकहे प्रेम और सुकून भरे रिश्ते का एहसास दर्शाती हुई।

अहसास…

रिद्धिमा और राघव के बीच पनपते विश्वास, अपनापन और अनकहे प्रेम को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित किया गया है। यह कहानी बताती है कि कुछ लोग जीवन में प्रेम का दावा लेकर नहीं आते, बल्कि सुकून बनकर हमारे भीतर जगह बना लेते हैं। रिश्तों की मर्यादा, भावनाओं की गहराई और आत्मीय जुड़ाव का सुंदर चित्रण इस कहानी को विशेष बनाता है।

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सांवला रंग

“सांवला रंग” एक प्रेरक लघुकथा है जो समाज में व्याप्त रंगभेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कहानी में एक माँ अपने जीवन में झेले गए तिरस्कार को याद करते हुए संकल्प लेती है कि उसकी बेटी की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों से होगी। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आता है जब उसकी बेटी आई.पी.एस. अधिकारी बनकर पूरे शहर का गौरव बन जाती है।

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