भारतीय परिवार की तीन पीढ़ियाँ सम्मानपूर्वक संवाद करती हुईं, जहाँ नई पीढ़ी आत्मविश्वास से अपनी बात रख रही है।

क्या यह कम है ?

क्या संस्कार का अर्थ केवल आज्ञाकारिता है, या सच कहने का साहस भी? यह लेख उस पीढ़ी की कहानी है जिसने स्वयं चुप रहकर जीवन जिया, लेकिन अपने बच्चों को प्रश्न पूछना, तर्क करना और सम्मान के साथ अपनी बात कहना सिखाया।

Read More
डोरी से चलने वाला पारंपरिक झालरदार बीजना, जिसके नीचे गर्मी की दोपहर में परिवार सुकून से विश्राम कर रहा है।

रेशम की डोरी..

आधुनिक बिजली के पंखों और एसी के दौर में भी कुछ यादें ऐसी होती हैं, जो मन को बरबस अतीत में ले जाती हैं। यह कविता “साटन का मोरा बीजना” पुराने समय के डोरी से चलने वाले झालरदार बीजने, घर-आँगन की आत्मीयता, संयुक्त परिवार की मधुरता और बचपन की सुकून भरी दोपहरों का मार्मिक चित्रण करती है।

Read More
रिमझिम सावन की बारिश में नाचता मोर, हरी-भरी प्रकृति, कागज़ की नाव और भारतीय मानसून का मनमोहक दृश्य।

रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे

सावन केवल बारिश का मौसम नहीं, बल्कि प्रकृति के नवजीवन, प्रेम, उल्लास और बचपन की मीठी यादों का उत्सव है। प्रस्तुत कविता “रिमझिम-रिमझिम सावन बरसे” में वर्षा की पहली फुहार, मिट्टी की सौंधी महक, मोर-पपीहे का उल्लास, हरी चूड़ियों की खनक और कागज़ की नावों से जुड़े बचपन के अनमोल पल अत्यंत सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किए गए हैं।

Read More
चाँदनी रात में शांत झील के किनारे सजे हुए रथ पर साथ बैठे भारतीय दंपति, जिनके चेहरे पर आत्मिक प्रेम, स्नेह और मधुर भावनाओं की झलक दिखाई दे रही है। आसपास खिलते फूल और चाँदनी कविता के श्रृंगार रस को साकार करते हैं।

प्रीति-रथ पर गीत बैठे

‘प्रीति-रथ पर गीत बैठे’ प्रेम, नेह और आत्मीय भावनाओं से ओतप्रोत एक मधुर हिंदी गीत है। इसमें चाँदनी, स्वप्न, रागिनी और प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को सजीव किया गया है। श्रृंगार रस से सुसज्जित यह कविता दो हृदयों के आत्मिक मिलन, जीवन की मधुर स्मृतियों और प्रेम की शाश्वत अनुभूति को अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है।

Read More
चाँदनी रात में खिड़की के पास चिंतन में बैठी एक महिला के सामने स्वप्न में प्रकट हुआ एक प्राचीन भारतीय बादशाह, जिसकी शांत मुद्रा अतीत से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती है।

गुज़ारिश

‘गुज़ारिश’ एक गहन चिंतनशील कविता है, जिसमें स्वप्न में आए एक गुज़रे दौर के बादशाह के माध्यम से अतीत, इतिहास, समय और वर्तमान पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया गया है। कविता यह संदेश देती है कि बीते समय की गलतियों में उलझकर वर्तमान और भविष्य को नहीं खोना चाहिए। कर्म, सकारात्मक सोच और बदलते समय के साथ आगे बढ़ने का संदेश देने वाली यह रचना पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है

Read More
परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश पत्र और किताबें हाथ में लिए शांतिपूर्वक बैठे भारतीय विद्यार्थी, जिनके चेहरों पर टूटे सपनों, संघर्ष, निराशा और न्याय की उम्मीद साफ़ दिखाई दे रही है। यह दृश्य पेपर लीक से प्रभावित युवाओं की पीड़ा और बेहतर भविष्य की उनकी आशा का प्रतीक है।

सपनों का टूटना

‘सपनों का टूटना’ एक मार्मिक सामाजिक कविता है, जो पेपर लीक, युवाओं के संघर्ष, बेरोजगारी, अन्याय और टूटती उम्मीदों की दर्दनाक सच्चाई को उजागर करती है। कविता उन लाखों विद्यार्थियों की पीड़ा को स्वर देती है, जिनकी वर्षों की मेहनत भ्रष्ट व्यवस्था के कारण प्रभावित होती है। यह रचना केवल आक्रोश नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ उठाने और बदलाव की उम्मीद का भी संदेश देती है।

Read More
टूटी हुई कठपुतली की डोरियों के साथ आत्मविश्वास से खड़ी एक भारतीय महिला, जिसके चेहरे पर आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और नई शुरुआत का भाव झलक रहा है। पृष्ठभूमि में अंधकार से उजाले की ओर जाता दृश्य नारी सशक्तिकरण और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक है।

कठपुतली

‘कठपुतली’ एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है, जो स्त्री को केवल रिश्तों या सामाजिक बंधनों तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे सृजन, चेतना, आत्मसम्मान और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक मानती है। कविता यह संदेश देती है कि स्त्री किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि अपने जीवन की स्वयं निर्माता है। संवेदनशील शब्दों और सशक्त भावों से सजी यह रचना नारी सम्मान, समानता और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती है।

Read More
कारगिल की पर्वतीय पृष्ठभूमि में तिरंगा थामे दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते भारतीय युवा, जो साहस, एकता, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक हैं।

युवा शक्ति का महासंग्राम

‘युवा शक्ति का महासंग्राम’ वीर रस से परिपूर्ण एक प्रेरक राष्ट्रभक्ति कविता है, जो युवाओं के अदम्य साहस, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त करती है। कविता बताती है कि जब भी युवा अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए हैं, उन्होंने इतिहास रचा है। ओजस्वी भाषा और जोशीले भावों से सजी यह रचना युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध का संचार करती है।

Read More
कारगिल विजय दिवस पर माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच की राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी

कारगिल विजय दिवस पर ‘माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत’ की राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत द्वारा 27 जुलाई को राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर के 200 से अधिक वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकार अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। आयोजन में प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं अतिथि भी सहभागिता करेंगे। मंच का उद्देश्य साहित्यिक प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान कर साहित्य और राष्ट्रभावना को सशक्त बनाना है।

Read More
बरसात की फुहारों के बीच खिड़की के पास खड़ी एक भारतीय महिला दूर क्षितिज की ओर निहार रही है। बाहर हरियाली और वर्षा है, लेकिन उसके चेहरे पर विरह, प्रतीक्षा और अनकही उदासी की गहरी छाप दिखाई देती है।

प्रतीक्षारत सावन

सावन केवल बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षा और अनकहे दर्द का भी नाम है। ‘प्रतीक्षारत सावन’ कविता उस मनःस्थिति को अभिव्यक्त करती है, जहाँ बाहर प्रकृति हरियाली से भर उठती है, लेकिन भीतर का आँगन अब भी किसी अपने की प्रतीक्षा में सूना रहता है।

Read More