हे श्रीकृष्ण! जन्म लो फिर से
मथुरा की अँधेरी रात से लेकर नंद के आँगन तक श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य कथा और उनके प्रेम, सत्य, धर्म तथा मानवता के संदेश को समर्पित भावपूर्ण कविता.

मथुरा की अँधेरी रात से लेकर नंद के आँगन तक श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य कथा और उनके प्रेम, सत्य, धर्म तथा मानवता के संदेश को समर्पित भावपूर्ण कविता.
पैंतीस साल से माँ से दूर रहने के बावजूद उनके कुछ पुराने रुमाल आज भी माँ के स्पर्श, दुलार और आश्वासन का एहसास कराते हैं. ‘माँ के ये रुमाल’ माँ-बेटी के अटूट रिश्ते की मार्मिक कविता है.
सावन की बदली, भीगी पलकें, कोयल की कूक और मन में उतरती प्रेम की याद. ‘मन अमराई महकी रे’ रिश्तों, प्रकृति और प्रीत के मधुर एहसासों से सजी भावपूर्ण हिंदी कविता है.
सावन की घटाटोप बारिश, लाल बोगनवेलिया और किसी की याद. काँटों के बीच भीगी पंखुड़ियों में छिपी यह कविता अधूरी मोहब्बत, दूरी और वफ़ा की खूबसूरत दास्तान कहती है.
भारत से पॉटरी एंड सिरामिक में मास्टर्स करने वाली पहली महिला ममता सिंह देवा से सृजन, संघर्ष, प्रेम, विद्रोह और स्त्री के सच पर एक आत्मीय बातचीत. सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे मिट्टी को आकार देने वाले हाथ जब शब्दों में जीवन का सच उकेरते हैं, तो सृजन की एक अनोखी यात्रा जन्म…
माँ के हाथों का स्वाद केवल भोजन का स्वाद नहीं, बल्कि ममता, त्याग और निस्वार्थ प्रेम की ऐसी विरासत है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे साथ चलती है।
जब मेहनत से उगाई गई ऑर्गेनिक सब्ज़ियों का स्वाद अलग होता है, तो क्या मौलिक रचना और चोरी की पंक्ति में भी कोई फ़र्क़ नहीं होना चाहिए? ‘ऑर्गेनिक कहानी’ इसी सवाल पर तीखा व्यंग्य है.
कुछ प्रेम कहानियाँ इसलिए अधूरी नहीं रह जातीं कि उनमें प्यार कम होता है, बल्कि इसलिए कि एक दिल बोल नहीं पाता और दूसरा उसकी खामोशी सुन नहीं पाता।
कृष्ण की बाँसुरी की अलौकिक तान से लेकर हिंदी फिल्मों के सदाबहार गीतों तक, बाँसुरी ने संगीत में प्रेम, विरह, प्रकृति और भावनाओं को एक अलग पहचान दी है।