Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
अम्मां के आंचल और गांव की पुरानी यादों को दर्शाता रामगढ़ गांव का ग्रामीण दृश्य

मेरा गांव जैसे अम्मां के आंचल की छांव 

सन् 1976 का रामगढ़ गांव, अम्मां का स्नेह, मिट्टी की खुशबू, लालटेन की रोशनी, चूड़ियों की छन-छन, दशहरे का मेला और बचपन की बेफिक्र दुनिया. यह संस्मरण उस समय की याद दिलाता है जब गांव सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और अपनापन से भरी पूरी दुनिया हुआ करता था.

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गुलमोहर की घनी छाँव पिता की याद में भावुक हिंदी कविता

 गुलमोहर की घनी छाँव

यह कविता पिता की स्मृतियों और उनके वात्सल्य को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। गुलमोहर की घनी छाँव और बचपन का घर कवयित्री के लिए पिता के स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का प्रतीक बन जाते हैं। पिता के दिए लाड़-दुलार, हर चिंता को समझने और कठिन समय में साथ देने की यादें आज भी उनके मन में जीवित हैं। पिता के जाने के बाद उनकी कमी और भी गहराई से महसूस होती है। कविता में बेटी अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है और मन में एक बार फिर उनकी गोद में सिर रखने की भावुक इच्छा प्रकट करती है।

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ससुर ने जेठानी और देवरानी के विवाद में सुनाया बड़ा फैसला

कमाऊ बहू 

कमाऊ बहू के आने के बाद घर में जेठानी और देवरानी के बीच बढ़ता भेदभाव आखिरकार टकराव में बदल गया। जब ललिता के सब्र का बाँध टूटा तो ससुर ने परिवार के सामने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने रिश्तों की असली तस्वीर सामने ला दी।

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आक्रोश और बेचैनी को शब्दों में व्यक्त करती हुई कलम और हिंदी कविता

एक दिन यूं ही !!

जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.

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शगुन अपने माता-पिता के साथ नए घर के सामने भावुक और खुश नजर आती हुई

फ़िज़ा गुलज़ार हो उठी

गरीबी और संघर्षों के बीच पली शगुन ने मेहनत के दम पर अपने माता-पिता के लिए सपनों का घर बनाया. लेकिन प्रेम और विवाह के सवाल पर उसका मन अब भी उलझा हुआ था. एक घटना ने उसके रिश्ते को नई दिशा दे दी.

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पिंजरे से खुले आकाश की ओर उड़ता पक्षी स्वतंत्रता और आजादी का प्रतीक

स्वतंत्रता..

स्वतंत्रता हर व्यक्ति की मूल आकांक्षा है, लेकिन इसकी अपनी एक सीमा और जिम्मेदारी भी होती है. यह लेख आजादी, रिश्तों, विचारों की स्वतंत्रता और ‘जिएँ और जीने दें’ के मानवीय संदेश पर विचार करता है.

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तिरंगे और भारत की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती स्वतंत्रता दिवस की देशभक्ति कविता

स्वतंत्रता की रागिनी

स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.

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पंद्रह अगस्त पर तिरंगे के साथ सच्ची देशभक्ति और स्वच्छता का संदेश देती हिंदी कविता

पंद्रह अगस्त मनाते हैं सब

पंद्रह अगस्त पर देशभक्ति के जश्न के बीच यह कविता एक जरूरी सवाल उठाती है—क्या केवल एक दिन तिरंगा लहराना ही देशभक्ति है? कविता स्वच्छता, एकता, भाईचारे और मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी को सच्ची देशभक्ति का आधार बताती है.

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हिंदी लेखिका और कवयित्री की साहित्यिक यात्रा तथा कुमकुम लगे पाँव काव्य संग्रह

शब्दों से सपनों तक का सफर

बचपन से शब्दों से जुड़ी लेखिका ने परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपनी रचनात्मक पहचान बनाई. ‘कुमकुम लगे पाँव’ उनके साहित्यिक सफर और स्त्री जीवन के विविध रंगों की संवेदनशील अभिव्यक्ति है.

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Image Alt Text: स्वतंत्रता दिवस के जश्न के बीच आम आदमी की जिंदगी और सामाजिक विडंबना दर्शाती हिंदी कविता

आज़ादी का सच

आज़ादी के जश्न, तिरंगे और देशभक्ति के नारों के बीच यह रचना आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों और सामाजिक विडंबनाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है.

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