gulmohar
सफेद साड़ी पहने तुलसी के पास दीप जलाती एक विधवा स्त्री

प्यार के रंग

क्या जीवनसाथी के जाने के बाद प्रेम का रंग बदल जाता है? अमिता कर की रचना ‘प्यार के रंग’ एक ऐसी स्त्री के मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती है, जिसके लिए पति की अनुपस्थिति में भी प्रेम, आस्था और समर्पण पहले जैसे ही हैं। बदलता है तो सिर्फ पहनावा, प्रेम नहीं।

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वीडियो कॉल पर चार बेटियों को देखकर भावुक होते भारतीय पिता

खाली हाथ

चार बहनों की वीडियो कॉल ने बचपन की यादें ताज़ा कर दीं। हँसी-मज़ाक और पुरानी बातों के बीच पिता के आँसू सबको भावुक कर गए। ‘खाली हाथ’ रिश्तों की दूरी और अपनों के साथ की अधूरी चाहत को बयां करती एक मार्मिक कहानी है।

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वर्ष 2001 के आसपास अखबार के दफ्तर में तबादले का आदेश पढ़ता पत्रकार

मुन्ना से कीर्ति राणा

साल 2001 के आसपास दैनिक भास्कर में इंदौर से उज्जैन तबादले का यह संस्मरण पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण दौर की यादें समेटे है। कीर्ति राणा और शशींद्र जलधारी के पेशेवर संबंधों, संपादकीय घटनाक्रम, अखबारी राजनीति और परिवार के साथ लिए गए कठिन फैसले की यह कहानी बताती है कि एक आदेश किस तरह जिंदगी की दिशा बदल सकता है।

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विजयादशमी पर जलते रावण के पुतले के सामने आत्ममंथन करता व्यक्ति

जलते पुतले, बढ़ते रावण

विजयादशमी केवल रावण का पुतला जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर भी है। यह कविता लोभ, अहंकार, छल, अन्याय और टूटते विश्वास पर सवाल उठाते हुए सच्चे विजयादशमी पर्व का अर्थ समझाती है। संदेश स्पष्ट है जब तक मन का रावण जीवित है, तब तक वास्तविक विजय अधूरी है।

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सच, ख़ामोशी और मन की वेदना को दर्शाती हिंदी कविता की प्रतीकात्मक तस्वीर

कविता कब तक सच कह पाएगी ?

यह कविता मन की वेदना, बिखरती कल्पनाओं, रिश्तों की उलझनों और सामाजिक परिस्थितियों से उपजी बेचैनी की अभिव्यक्ति है। जब शब्द मौन होने लगते हैं और सच कहना कठिन हो जाता है, तब कविता अपने अस्तित्व, संवेदना और ज़मीर को बचाए रखने का सवाल उठाती है।

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शाम की रोशनी में खिले सफेद रजनीगंधा के फूल

रजनीगंधा-सी तुम

रजनीगंधा की भीनी-भीनी खुशबू की तरह कुछ प्रेम दिल में हमेशा महकते रहते हैं। यह छोटी-सी कविता मिलन की खुशी, विरह की कसक और हर बिछड़न के बाद फिर से खिल उठने वाले प्रेम का एहसास कराती है।

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पुरानी रेल यात्रा में भारतीय परिवार घर से लाई आलू-पूरी खाते हुए

याद न जाए बीते दिनों की!

कभी रेल यात्रा का मतलब था घर से बँधी आलू-पूरी, अख़बार में परोसी चाट, खिड़की से मिलती चाय और अनजान सहयात्रियों से बनती दोस्ती। आज सुविधाएँ बढ़ गई हैं, लेकिन क्या सफ़र का वह अपनापन कहीं पीछे छूट गया है? बीते दिनों की यादों में डूबा एक आत्मीय संस्मरण।

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: तारों और झील के प्रतिबिंब में प्रिय की याद महसूस करती एक महिला

उसने कहा था…

प्रेम केवल साथ होने का नाम नहीं, बल्कि दूर रहकर भी हर एहसास में जीवित रहने का नाम है। ‘उसने कहा था…’ एक ऐसी प्रेम कविता है, जहाँ सितारों की चमक, लहरों का अक्स और दिल की धड़कन में किसी अपने की याद बसती है।

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प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अस्तित्व, स्वतंत्रता और भावनाओं का सम्मान करने का नाम है। रिश्तों में विश्वास, संवाद और आत्मसम्मान ही सच्चे प्रेम की बुनियाद हैं।

बस यूँ ही…

प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अस्तित्व, स्वतंत्रता और भावनाओं का सम्मान करने का नाम है। रिश्तों में विश्वास, संवाद और आत्मसम्मान ही सच्चे प्रेम की बुनियाद हैं।

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अमिता कर की ‘एक पुस्तक, एक नई दुनिया’ पहल के लिए भेंट की गई पुस्तकें

अमिता कर ने पुस्तकों के जरिए बढ़ाया ‘एक पुस्तक, एक नई दुनिया’ का कारवाँ

लाइव वॉयर न्यूज की ‘एक पुस्तक, एक नई दुनिया’ पहल को लेखिका अमिता कर का सहयोग मिला है. उन्होंने अपनी दो पुस्तकें भेंट कर साहित्य को नए पाठकों तक पहुँचाने और पठन-संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास को मजबूती दी.

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