ठंडी शाम में चाय के साथ पुरानी यादों में खोई महिला, मोबाइल स्क्रीन पर दोस्त से बातचीत

कुछ अनकहे रिश्ते…

कुछ अनकहे रिश्ते” एक मार्मिक कहानी है जो दोस्ती, ममता और विश्वास के उस पवित्र बंधन को दर्शाती है, जिसे नाम की आवश्यकता नहीं होती। यह रचना भावनाओं की गहराई और रिश्तों की सच्चाई को स्पर्श करती है।

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भारतीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ खड़ा, पृष्ठभूमि में संविधान की प्रतीकात्मक छवि

मैं भी मनुष्य हूँ…

“मैं भी मनुष्य हूँ” कविता तीसरे लिंग के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह रचना समाज से स्वीकार्यता और समानता की मांग करते हुए मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उजागर करती है।

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बाढ़ से डूबता गांव और हाथ में किताब लिए खड़ी उदास बच्ची

“झूठा गांव”

“झूठा गांव” एक भावनात्मक कहानी है जिसमें किताबों के सुंदर गांव और बाढ़ से जूझते वास्तविक गांव का अंतर दिखाया गया है। गंगा की भीषण कटान के बीच एक बच्ची के टूटते सपनों की मार्मिक प्रस्तुति पाठकों को भीतर तक झकझोर देती है।

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डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को ‘मातृभाषा रत्न’ से सम्मानित

जमशेदपुर की साहित्यकार डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शब्द प्रतिभा फाउंडेशन नेपाल द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

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बड़ा बैनजी श्यामलता शर्मा: एक युग का अंत

बड़ा बैनजी- श्यामलता शर्मा

महिदपुर रोड की 95 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका श्यामलता शर्मा, जिन्हें पूरा क्षेत्र “बड़ा बैनजी” के नाम से जानता था, अब हमारे बीच नहीं रहीं। बेटियों की शिक्षा के लिए उनका संघर्ष, उनका स्नेह और उनकी रोशन मुस्कान पीढ़ियों तक याद की जाएगी।

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एक आत्मविश्वासी भारतीय महिला खुले आकाश के नीचे खड़ी है, एक हाथ में किताब और दूसरे में तलवार का प्रतीकात्मक रूप, चेहरे पर दृढ़ता और गरिमा का भाव।

नारी

“नारी” एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है जो स्त्री को शक्ति, साहस, गरिमा और सृजन की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत करती है। यह रचना नारी के मातृत्व, संघर्ष, शिक्षा, विज्ञान और आत्मरक्षा में अग्रणी स्वरूप को सम्मानपूर्वक नमन करती है।

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वृद्धाश्रम की बेंच पर अकेली बैठी एक बुजुर्ग महिला, हाथ में माला, चेहरे पर उदासी और आंखों में गहरी सोच, शांत और भावुक वातावरण।

बुढ़ापे की व्यथा

“बुढ़ापे की व्यथा” एक मार्मिक कविता है जो वृद्धाश्रम में बैठे माता-पिता की पीड़ा, उपेक्षा और टूटते पारिवारिक मूल्यों की करुण सच्चाई को उजागर करती है। यह रचना समाज को आईना दिखाती है और संतान को अपने कर्तव्यों की याद दिलाती है।

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एक उदास महिला खिड़की के पास बैठी है, आंखों में आँसू, हाथ में पुरानी चिट्ठी, धुंधली रोशनी में प्रेम और विरह की भावना झलकती हुई।

इश्क़ की इंतहा

राँची, झारखंड की कवयित्री अर्पणा सिंह की यह मार्मिक ग़ज़ल प्रेम, विरह, तड़प और आत्मिक समर्पण की गहराइयों को उजागर करती है। “ज़िंदगी में तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं” पंक्ति के माध्यम से प्रेम की पूर्णता और विरह की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण किया गया है।

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घर के कोने में अकेली बैठी एक भारतीय महिला, शांत लेकिन उदास चेहरा, पास में सजा हुआ घर और दीवार पर टंगी परिवार की तस्वीरें

मुझे अच्छा नहीं लगता…

“मुझे अच्छा नहीं लगता” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो एक गृहिणी के अनदेखे श्रम, भावनात्मक अकेलेपन और उपेक्षा के दर्द को उजागर करती है। यह रचना उन स्त्रियों की आवाज़ है, जो परिवार के लिए सब कुछ समर्पित कर देती हैं, लेकिन बदले में मान-सम्मान की कमी महसूस करती हैं।

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सड़क पर अपमानित खड़ी एक रोती हुई युवती, पृष्ठभूमि में धुंधला शहर और भावुक माहौल

मोहब्बत एक ज़हर

“मोहब्बत एक ज़हर” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो प्रेम में अपमान, सामाजिक भय, और माता-पिता के सम्मान के बोझ तले टूटती एक बेटी की पीड़ा को दर्शाती है। यह कविता युवा भावनाओं, पछतावे और परिवार की प्रतिष्ठा के संघर्ष को संवेदनशील शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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