नवरात्रि में सजी हुई माँ दुर्गा की प्रतिमा, दीपों और भक्तों के साथ पूजा का दृश्य

माँ का आगमन

“माँ के आगमन का पैगाम” एक सुंदर और भावपूर्ण भक्ति कविता है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के आगमन की खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करती है। इस कविता में प्रकृति और मानव जीवन के बीच के उस गहरे संबंध को दर्शाया गया है, जो माँ के आगमन के साथ नवजीवन और उत्साह से भर उठता है।

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माँ दुर्गा के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हुई भक्त, दिव्य और शांत वातावरण

मेरी माँ है तू ,तेरी बेटी रहूँगी

मेरी माँ है तू” एक अत्यंत भावपूर्ण भक्ति कविता है, जिसमें एक भक्त का अपनी माँ दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण झलकता है। इस कविता में कवयित्री ने स्वयं को माँ की बेटी के रूप में प्रस्तुत करते हुए जीवन भर उनकी शरण में रहने की भावना व्यक्त की है।

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मुंबई में आयोजित महिला सशक्तीकरण पर साहित्यिक कार्यक्रम का दृश्य

स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर

मुंबई में ‘स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर’ विषय पर आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में स्त्री जीवन के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श किया गया। ‘बतरस : एक अनौपचारिक उपक्रम’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विभा रानी ने स्त्री-पुरुष असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और आधुनिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे।

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महिला खिड़की के पास बैठकर कविता लिखते हुए, भावनात्मक और रचनात्मक माहौल

मेरी प्रिय कविता

“मेरी प्रिय कविता” एक ऐसी भावनात्मक रचना है, जिसमें कवयित्री ने अपने मन और शब्दों के बीच के गहरे संबंध को बेहद सहज और सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है। यह कविता बताती है कि कैसे कविता केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह मन की उलझनों को सुलझाने का माध्यम भी बन जाती है।

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नवरात्रि में स्थापित कलश, आम्र पत्तों और नारियल के साथ पूजा स्थल

कलश स्थापना एवं महत्व

“कलश स्थापना एवं महत्व” एक आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक लेख है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर किए जाने वाले इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान की गहराई को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है।

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नानी के घर की छुट्टियां—बचपन की सबसे खूबसूरत यादें

वो जो छुट्टियां थीं

“वो जो छुट्टियां थीं” एक भावनात्मक और नॉस्टेल्जिक लेख है, जो हमें सीधे बचपन की उन सुनहरी यादों में ले जाता है, जहाँ नानी का घर हर खुशी का केंद्र हुआ करता था। यह रचना केवल छुट्टियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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समुद्र किनारे अकेला पथिक दूर क्षितिज की ओर देखता हुआ

एक पथिक

“एक पथिक” एक गहन भावनात्मक हिंदी कविता है, जिसमें सागर और पथिक के प्रतीकों के माध्यम से मन की व्यथा, प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मसंवाद को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है। यह कविता केवल बाहरी दृश्य का चित्रण नहीं करती, बल्कि भीतर चल रहे भावनात्मक द्वंद्व और एकाकीपन की गहराई को उजागर करती है।

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छोटी गौरैया चिड़िया तिनका लेकर घोंसला बनाती हुई

गौरैया

“गौरैया” एक संवेदनशील और सरल भाषा में लिखी गई ऐसी कविता है, जो नन्हीं चिड़िया के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश देती है। यह कविता हमें उस दुनिया की याद दिलाती है, जहाँ कभी गौरैया की चहचहाहट हर आँगन की पहचान हुआ करती थी।

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अर्तम काव्य संग्रह की पुस्तक के साथ शिव और कमल का प्रतीकात्मक चित्र

‘अर्तम’ काव्य संग्रह समीक्षा: दिव्या सक्सेना की संवेदनशील कविताएं

मकालीन हिंदी कविता के बदलते परिदृश्य में दिव्या सक्सेना का काव्य संग्रह ‘अर्तम’ एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आता है। यह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की गहरी पड़ताल है।

आज के दौर में जहां कविता अक्सर सपाट बयानी और अतुकांत शैली तक सीमित होती जा रही है, वहीं ‘अर्तम’ अपनी प्रतीकात्मकता, भाव-गहनता और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण अलग पहचान बनाता है। इस संग्रह में शिवत्व, आत्मबोध, स्त्री-चेतना और जीवन संघर्ष जैसे विषयों को सहज लेकिन प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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पुराने लकड़ी के संदूक में रखी बचपन की यादें, माँ की साड़ियाँ और भावनात्मक माहौल

एक नायाब संदूक

“एक नायाब संदूक” केवल एक कविता नहीं, बल्कि स्मृतियों का ऐसा कोमल संसार है, जहाँ बचपन की शरारतें, यौवन के सपने और माँ का स्नेह एक साथ सिमट आते हैं। इस कविता में संदूक एक प्रतीक बनकर उभरता है वह स्थान जहाँ जीवन के सबसे अनमोल क्षण सुरक्षित रहते हैं।

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