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मन से मंच तक : कवयित्रियों के संगम से महका साहित्य जगत

महिला काव्य मंच का अष्टम अंतरराष्ट्रीय वार्षिकोत्सव, मुंबई में 21 दिसंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश-विदेश की 25 इकाइयों की कवयित्रियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, ‘मकाम’ ध्येय गीत की प्रस्तुति और 50 से अधिक कवयित्रियों का काव्य पाठ शामिल था। महाराष्ट्र इकाई को सर्वोत्तम प्रदेश इकाई सम्मान 2024 से नवाजा गया।

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माँ तो माँ होती है…

माँ का साथ शब्दों का मोहताज नहीं होता। कभी वह धूप में छाता बन जाती है, तो कभी जीवन की भीड़ में सहारा। उम्र भले ही शरीर पर अपना असर छोड़ दे, पर माँ की मौजूदगी वही सुकून देती है. निःशब्द, निःस्वार्थ और पूरी तरह सुरक्षित। माँ के साथ बिताया हर पल स्मृति बनकर जीवन भर साथ चलता है

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बिस्तरबंद: जब सफ़र में घर साथ चलता था

एक समय था जब हर यात्रा का सबसे भरोसेमंद साथी “बिस्तरबंद” होता था। उसमें सिर्फ बिस्तर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सहूलियत, बचपन की जिज्ञासाएँ और सफ़र की गर्माहट बंद होती थी। आज भले ही एयरबैग ने उसकी जगह ले ली हो, पर यादों में बिस्तरबंद अब भी ज़िंदा है।

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“राष्ट्रीय गणित दिवस” पर हुआ लघु फिल्म का लोकार्पण

यूट्यूब पर सफल लघु फिल्मों की श्रृंखला के बाद “द यश मंगलम शो” की नवीनतम प्रस्तुति लघु फिल्म “द लीगेसी ऑफ मैथेमेटिक्स” का लोकार्पण 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर किया गया। इस अवसर पर बिहार फिल्म विकास निगम के मुख्य सलाहकार अरविंद रंजन दास ने फिल्म का औपचारिक विमोचन किया।

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अरावली : सभ्यता, प्रकृति और भविष्य की पुकार

अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ नहीं, बल्कि भारत की सबसे पुरानी प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरणीय सुरक्षा कवच है। नीतिगत परिभाषाओं के नाम पर यदि इसे कानूनी संरक्षण से बाहर किया गया, तो अवैध खनन, जल संकट और मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ेगा। अरावली को बचाना आज केवल पर्यावरण नहीं, देश के भविष्य को बचाने का सवाल है।

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संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी का दिव्य आगमन

डॉ प्रेरणा मनाना, पूर्व निदेशक आरडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, लेखिका स्तंभकार इंदौर- भारतीय संत परंपरा के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी, बुधवार को हमारे निवास स्थान पधारे। उनके आगमन से पूरा वातावरण दिव्यता, शांतिपूर्ण ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। संत श्री अभिराम दास जी त्यागी न केवल एक…

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बिना स्क्रीन का बचपन

बचपन में आम की गुठलियाँ हमारी खुशियों का साधन थीं। महिदपुर रोड की गलियों में बिखरी गुठलियाँ अंकुरित होकर छोटे पौधे बन जाती थीं। हम उन्हें उखाड़कर घर लाते, पत्थर पर घिसते और फूँक मारकर सुनते “बज रहा है या नहीं।” टूटती गुठली पर डाँट और मार भी सहते, फिर अगले दिन फिर से तलाश में निकल पड़ते। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, वह सिर्फ़ खेल नहीं था. धैर्य, लगन और छोटे-छोटे प्रयासों की सीख भी थी, जो अब तक दिल में धीरे-धीरे बजती रहती है।

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ग्लोबल सोलर एक्सपो में आनंद पोरवाल की सक्रिय भूमिका

इंदौर के होटल शेरेटन में 17 व 18 दिसंबर को आयोजित ङ्गइंदौर ग्लोबल सोलर एक्सपो एवं सूर्यकॉन कॉन्फ्रेंस2025फ में देशभर की नामी सोलर कंपनियों ने अपने नवीन सोलर उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन किया. इस दो दिवसीय भव्य आयोजन में सोलर सोल्यूशन कंपनी, उदयपुरमहिदपुर रोड, रतलाम ने भी अपना प्रभावी स्टॉल लगाकर विजिटर्स को आधुनिक सोलर उत्पादों की जानकारी दी.

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काँच नहीं, अब धार हूँ

कभी किसी दिन जीवन की भाग-दौड़ से पल चुराकर मैं अपनी ही बनाई शांति में बैठूँगी। फूलों, पेड़ों और परिंदों की चहचहाहट के बीच मैं खुद को सुनूँगी और तब समझ आएगा कि सबसे बड़ा सहारा मैं स्वयं रही हूँ। टूटकर भी जिसने खुद को समेटा, वही मेरी असली पहचान है।

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रात के नौ बजे, जब किस्मत जागती थी…

रात के ठीक नौ बजते ही महिदपुर रोड की रफ्तार बदल जाती थी। दादाभाई की दुकान के आसपास भीड़ सिमटने लगती, आँखों ही आँखों में फैसले हो जाते और किस्मत अपने पत्ते खोलने को तैयार रहती। नंबर खुलते ही कोई भीतर ही भीतर टूट जाता, तो कोई ऑपरेशन थिएटर के सफल होने जैसी राहत महसूस करता। वलन मिलते ही गर्म दूध के कड़ाह चढ़ जाते, मावाबाटी और रबड़ी के ऑर्डर लगते और पुरानी उधारियाँ मिठास में घुलकर उतर जातीं।यह सिर्फ़ सट्टे का खेल नहीं था. यह एक पूरे कस्बे की रातों की धड़कन थी।

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