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ज़िंदगी

ज़िंदगी मिली तो है, लेकिन ठंड, बेबसी और हालातों की मार ने उसे जीने का संघर्ष बना दिया है. वादों और प्रलोभनों में इस्तेमाल होकर, ज़िंदगी अक्सर फुटपाथों और अंधेरों में भुला दी जाती है.

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दुविधा का रंग

यह जीवन की वह अवस्था है जहाँ न बचपन की मासूमता पूरी तरह बची है, न बुढ़ापे का सुकून मिला है। जिम्मेदारियों के बीच खड़ा इंसान कभी समाज की अपेक्षाओं को सुनता है, तो कभी अपने दिल की धीमी पुकार को। इसी द्वंद्व में वह खुद को पहचानता है और समझता है कि यही सफ़र जीवन का असली रंग है।

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मुझे ज़िंदगी में तिजारत करना नहीं आया

जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।

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झंकार में दबा इंतज़ार

पायल और कंगनों की झंकार के बीच प्रेमिका अपने ही मन की उलझनों में बंधी है। आँसू, उदासी और अधूरी चाहत उसे प्रिय से मिलने से रोक रही हैं, और रात चाँद के साथ उसका मौन साक्षी बन जाती है।

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दादी की बिंदी…

गांव के फेरीवाले से सुर्ख लाल बिंदी खोजता दादा, दरअसल अपने प्रेम और सम्मान को जीवित रखना चाहता है। बहू की कठोरता के बीच दादी का स्वाभिमान और दादा का निश्छल प्रेम सामने आता है, जब वह स्वयं दादी के माथे पर बिंदी लगाता है—जैसे वर्षों बाद पूर्णिमा का चाँद खिल उठा हो।

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खानदानी लोग

मेहनत और आत्मसम्मान के बल पर आगे बढ़ी मीना, शोध के दौरान अपने मार्गदर्शक राहुल से प्रेम कर बैठती है। तीन वर्षों के संबंध के बाद राहुल जाति-घमंड और स्वार्थ के आगे प्रेम को नकार देता है। मीना के सपने, विश्वास और आत्मा सब एक साथ टूट जाते हैं, और वह सामाजिक क्रूरता का नंगा सच देखती है।

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शताब्दी वर्ष पर मोहन राकेश को याद किया ‘बतरस’ ने॰॰॰

मुंबई के केशव गोरे ट्रस्ट सभागार में सांस्कृतिक संस्था ‘बतरस’ के 27वें मासिक आयोजन में साहित्यकार मोहन राकेश की रचनात्मक विरासत पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य और नाटक का सशक्त स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं के कारण प्रासंगिक है। कार्यक्रम में उनके नाटकों और कहानियों के अंशों की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ हुईं और समापन राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

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स्टेशन पर तुलेगा सामान, एक्स्ट्रा लगेज पर ज्यादा किराया

अब रेल यात्रा के दौरान अतिरिक्त सामान ले जाना महंगा पड़ सकता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार, 17 दिसंबर को लोकसभा में स्पष्ट किया कि ट्रेन में तय सीमा से अधिक सामान ले जाने पर यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

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5 और ट्रेनों में तत्काल टिकट के लिए लगेगा ओटीपी

भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी
आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है. इसी क्रम में सेंट्रल रेलवे की ५ और ट्रेनों में यह नई व्यवस्था १९ दिसंबर २०२५ से लागू की जा रही है.भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है.

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जयपुर से चेन्नई जाने वाली इंडिगो फ्लाइट रद्द

जयपुर एयरपोर्ट से चेन्नई जाने वाली इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट के अचानक रद्द होने से बुधवार को यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-5362 को ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए अंतिम समय पर कैंसिल कर दिया गया. यह फ्लाइट सुबह 9.55 बजे जयपुर से रवाना होकर दोपहर 12.35 बजे चेन्नई पहुंचने वाली थी.

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