
सुरेखा अग्रवाल “स्वरा” (उत्तरप्रदेश)
मन के बाँध पर भावनाओं का सैलाब अक्सर बाढ़ सा प्रतीत होता है।
मन की नदी यदा-कदा उफान पर उतर आती है,
तो कभी अनवरत बहती हुई पहुँच जाती है घाटों पर स्थित मंदिरों के पायदानों को छूने।
शैवालों के संग जा पहुँचती है शिवलिंग तक,
जटाधारी अस्तित्व को पाने की ख़ातिर
शांत होने या फिर अपने अवरुद्ध हुए मार्ग की ख़ातिर।
कोलाहल समागम का अक्सर तट से टकराकर लौटने की
चाह में पल भर थम जाता है, डूबी हुई क्षत-विक्षत लाशों संग,
तो कभी बीच मझधार में बेबस खड़ी किश्तियों के पास।
संघर्ष से हारी, वह अभी भी खड़ी है
जूझती अपने अस्तित्व संग,
हर लहर, हर वेग।
हर जयकारे पर रोमांचित,
तो हर “राम नाम सत्य है” के उद्घोष से अचंभित।
चल रहा है मन का युद्ध,
मन की भावनाओं के संग
एक प्रतीक्षित इंतज़ार के लिए।
सिर्फ मौन समर्पण, दधीचि की ख़ातिर,
मणिकर्णिका सा अन्तहीन विश्राम लिए।
सुनो, न प्रतीक्षाएँ भी मरती हैं।
सच है, यह कि प्रतीक्षाएँ भी मरती हैं,
आँखों में प्रिय की तस्वीर लिए।
सुरेखा अग्रवाल ‘स्वरा’
समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं।
महाराष्ट्र में जन्मी और उत्तर प्रदेश में स्थायी रूप से निवासरत, आपने अंग्रेज़ी और एंथ्रोपोलॉजी में स्नातक शिक्षा प्राप्त की है।
आपकी लेखनी में भावनाओं की गहराई और सामाजिक सरोकारों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। आप कई साझा संग्रहों “रूह की आवाज़” और “कश्ती में चाँद” से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और डिजिटल मंचों पर आपकी कविताएँ, लघुकथाएँ और संस्मरण निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। आप आकाशवाणी, पॉडकास्ट और रेडियो मंचों पर सक्रिय सहभागिता के साथ लगभग 70 से अधिक कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं। V4U रेडियो में एक आधिकारिक रेडियो जॉकी के रूप में आप साहित्यिक कार्यक्रमों का सफल संचालन कर रही हैं। आपने अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों के साक्षात्कार लेकर साहित्यिक जगत में विशेष पहचान बनाई है। आपको “अहिल्याबाई होल्कर पुण्यश्लोका पुरस्कार” सहित कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2026 में ‘शारदा-रामनाथ कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित होने जा रही सुरेखा अग्रवाल ‘स्वरा’ साहित्य जगत की प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं।
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