मन की भावनाओं के सैलाब और नदी के प्रतीक के माध्यम से जीवन, संघर्ष और प्रतीक्षा को दर्शाती हिंदी कविता

मन की नदी में उठता सैलाब

यह कविता मन की गहराइयों में उठते भावनाओं के सैलाब को नदी के रूपक के माध्यम से व्यक्त करती है। कभी शांत तो कभी उफनती यह मन की धारा जीवन के संघर्ष, पीड़ा और प्रतीक्षा को अपने साथ बहा ले जाती है। घाट, शिवलिंग, मणिकर्णिका और लहरों के प्रतीक इस यात्रा को आध्यात्मिक और यथार्थ दोनों रूपों में प्रस्तुत करते हैं। यह रचना केवल भावनाओं का प्रवाह नहीं, बल्कि अस्तित्व की खोज, टूटन और समर्पण का भी चित्रण है, जहाँ अंततः प्रतीक्षा भी थककर समाप्त हो जाती है।

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