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हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की भव्य पूजा और भक्तों का उत्सव

महाबली हनुमान जयंती

महाबली हनुमान के जन्म दिवस पर भक्तों में उत्साह और भक्ति की लहर है. यह कविता उनकी शक्ति, विनम्रता और श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम को समर्पित है.

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गोगापुर गौशाला में गायों को चारा खिलाते समाजजन, बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का दृश्य

बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा

महिदपुर रोड के गोगापुर गौशाला में बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज की गरिमामयी उपस्थिति में सेवा, श्रद्धा और धर्म का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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पेड़ के नीचे ध्यान में बैठा व्यक्ति और सामने प्रकाश रूप में प्रकट चेतना, आत्मसंवाद और आंतरिक शांति का प्रतीक

चेतना और मनुष्य का संवाद

यह रचना मनुष्य और उसकी चेतना के बीच एक गहन संवाद को प्रस्तुत करती है, जहाँ आत्ममंथन, मोह, विरक्ति और जीवन के सत्य पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। यह केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है, जो व्यक्ति को स्वयं से साक्षात्कार की ओर ले जाती है।

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एवाॅन एन्क्लेव में क्रिकेट का रोमांच

मुंबई के बोरीवली स्थित एवाॅन एन्क्लेव में आयोजित एक दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट में ‘हैट-6-वाइपर्स’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। यूथ क्लब द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में महिला खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी और सभी आयु वर्ग के खिलाड़ियों के उत्साह ने इसे यादगार बना दिया।

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भीड़भाड़ वाली शहर की सड़क पर अकेला बैठा एक उदास व्यक्ति, आसपास लोग मोबाइल में व्यस्त, आधुनिक जीवन की संवेदनहीनता और अकेलेपन का दृश्य

खामोश रिश्ते

यह कविता आधुनिक समाज की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ हर व्यक्ति अपनी ही बात कहने में व्यस्त है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं बचा। रिश्तों की निकटता केवल भौतिक रह गई है लोग पास होकर भी दूर हैं, और मन की पीड़ा अनसुनी रह जाती है।

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बरसात के बीच गाँव की पगडंडी पर खड़ी एक युवती, दूर से आते प्रियजन के साथ प्रेम और सुकून का भाव, बादलों के बीच उभरता इंद्रधनुष और हरियाली से भरा शांत वातावरण

इंद्रधनुष सा प्रेम

यह कविता प्रेम की उस गहराई को व्यक्त करती है, जो केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के हर दर्द को सहेजकर उसे सुकून में बदल देती है। प्रिय का साथ मानो सावन की पहली बारिश की तरह है, जो तपती हुई धरती यानी थके हुए मनको ठंडक और नई ऊर्जा देता है।

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धूल से ढके पेड़ के नीचे साइकिल के पास खड़ी एक लड़की, पर्यावरण और प्रकृति के संवाद का प्रतीक

प्रकृति और मैं…

यह रचना मनुष्य और प्रकृति के बीच के गहरे और जटिल संबंध को उजागर करती है। एक साधारण-सी प्रतीत होने वाली घटना एक लड़की का साइकिल रोककर पेड़ के नीचे खड़ा होना. धीरे-धीरे एक गहन संवाद में बदल जाती है, जहाँ एक पत्ती स्वयं बोलकर प्रकृति की पीड़ा व्यक्त करती है।

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