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बूंदों के नूपुर

अम्बर चमके दामिनी, रिमझिम पड़े फुहार, सोंधी माटी की महक से भीगता देहात, सावन की झूले झूलती सखियाँ, बादलों संग गूंजता बूंदों का संगीत — यह कविता मानसून के सौंदर्य, ग्रामीण जीवन के उल्लास और प्रकृति की रूमानी छवि को भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है।

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परदों के रंग से बदलें घर का भाग्य

वास्तु शास्त्र में जैसे दिशाओं का महत्व है, वैसे ही रंगों की भी विशेष भूमिका होती है. हमारे घर की बनावट, साज-सज्जा और रंग संयोजन सिर्फ सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि हमारे जीवन में मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द भी लाते हैं. घर के दरवाजे-खिड़कियों पर लगाए जाने वाले परदों का रंग वास्तु की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. आइए जानें कि किस दिशा और व्यक्ति के लिए कौन सा रंग शुभ माना गया है और क्यों.

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दोगले दिखावे में डूबी सभ्यता

इस व्यंग्यात्मक कविता में आधुनिक सभ्यता पर तीखा प्रहार किया गया है, जहाँ दिखावे की चकाचौंध में इंसान की असली पहचान खोती जा रही है। हर वर्ग, हर उम्र इस बनावटी संस्कृति की चपेट में है — चाहे वह भाषा हो, पहनावा हो, या जीवनशैली। ‘दाढ़ी पेट में है’ जैसे प्रतीकों के ज़रिए लेखक ने दिखावे की भूख को उजागर किया है, वहीं ‘चंगू जी बिक गए’ जैसे कटाक्षों से सामाजिक मूल्यों के पतन की ओर इशारा किया गया है। यह अंश समाज की दोहरी मानसिकता, भाषा के घमंड और आत्मकेंद्रित प्रवृत्तियों की एक झलक पेश करता है — जहाँ आंतरिक मूल्य गौण हो गए हैं और बाहरी प्रदर्शन ही सब कुछ बन गया है।

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सूर्य को अर्घ्य देने से मिलते हैं स्वास्थ्य, यश और सफलता

सूर्य केवल प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि वह हमारे जीवन के स्वास्थ्य, सफलता, यश और राज्य पद का भी कारण है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से न केवल नौ ग्रह अनुकूल होते हैं, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याएं भी हल होती चली जाती हैं। जानिए सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि, विशेष उद्देश्य अनुसार उपाय और जरूरी सावधानियां।

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जिसके सिर पर छांव नहीं थी… वो खुद सूरज बन गया”

फादर्स डे पर बच्चों ने मुझे बधाई दी, लेकिन मैं अपने पिता को कभी ‘हैप्पी फादर्स डे’ नहीं कह पाया। क्योंकि वो होते हुए भी कभी पिता जैसे नहीं रहे। ठोकरें लगीं, खुद ही संभला, खुद ही सीखा… शायद इसी में ज़िंदगी की असली सीख थी।”

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father teaching math to child with broken pens and nervous expressions, funny childhood memory scene

पिता और पढ़ाई

पिता और पढ़ाई का रिश्ता जीवन भर का एक अद्वितीय अनुभव है, जिसमें कभी प्रेम, कभी भय, और कभी हँसी का मिश्रण होता है। एक गणित अध्यापक पिता का अपने बच्चों को पढ़ाने का अंदाज़, उनके पेन खोजने की आदतें, और ‘लाभ-हानि’ के दो थप्पड़ों की यादें, यह सब मिलकर एक घरेलू, आत्मीय और हास्य-व्यंग्य से भरी स्मृति बन जाते हैं। यह संस्मरण न सिर्फ एक पिता की जटिलताओं को दिखाता है, बल्कि उनके भीतर छिपे प्रेम, अनुशासन और अनोखी सोच को भी उजागर करता है

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मेरे पापा – मेरी ताक़त”

“जब दुनिया ने मुँह मोड़ा, राहें सब सूनी थीं,
पापा के आँगन में उम्मीदें बस जीती थीं।
हर हार में उन्होंने मुझे मुस्कराना सिखाया,
हर गिरने पर खुद उठकर चलना सिखाया।
पापा — आप मेरे भगवान हैं इस ज़मीं पर,
आपके बिना ये जीवन अधूरा सा है हर पल।”

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जीरो पॉइंट तक का बर्फीला रोमांच

सवेरे-सवेरे हम श्रीनगर से सोनमर्ग के लिए निकले, लेकिन हमें यह अंदाज़ा नहीं था कि असली रोमांच तो सोनमर्ग के आगे शुरू होगा — जब हम 11600 फीट की ऊंचाई पर स्थित जीरो पॉइंट की ओर बढ़े। हरियाली भरे सोनमर्ग से लेकर बर्फीले ज़ोजिला दर्रे तक का यह सफर एक ओर प्रकृति की अद्भुत सुंदरता दिखाता है तो दूसरी ओर मानव की साहसिक सीमाओं को छूता है। ज़ोजिला टनल का निर्माण इस दुर्गम क्षेत्र में इंजीनियरिंग की एक मिसाल है। प्रकृति की यह बर्फीली गोद हमें सिखाती है कि जीवन छोटा है, इसलिए इसे प्यार और अपनों के साथ भरपूर जिया जाए।

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खेत में मेहनत करती माँ और उसके साथ खड़ा बच्चा, जो गरीबी और शिक्षा के संघर्ष को दर्शाता है

ये कैसा सवाल

गरीबी और मजबूरी के बीच पला-बढ़ा एक छोटा सा बच्चा, जब जीवन की सच्चाई को करीब से देखता है, तो उसके भीतर एक बड़ा बदलाव जन्म लेता है। यह कहानी आठ वर्षीय भानु और उसकी मजदूर माँ रमिया की है, जो रोज़मर्रा की कठिनाइयों के बीच भी अपने बेटे के बेहतर भविष्य का सपना देखती है।

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हाउस बोट में एक रात: लकड़ी की नक्काशी और झील की ठंडी हवा का जादू

यदि श्रीनगर में डल झील न होती तो शायद श्रीनगर की पहचान ही अधूरी रह जाती। ये झील न केवल कश्मीर की रूह है, बल्कि यहाँ की हाउस बोट और शिकारा सैर यात्रियों को एक अनोखा अनुभव देती है। लकड़ी की नक्काशीदार हाउस बोट, झील में तैरता मीना-बाजार, और शिकारे से होता हुआ रोमांचकारी सफर — यह सब मिलकर डल झील को स्वर्ग बनाते हैं।”

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