
शैफाली सिन्हा, लेखिका, नवी मुंबई
इन आँखों में जैसे कोई दबी-सी रागिनी है
कुछ अनकहे शब्द,
कुछ अधूरी-सी कहानी।
चेहरे पर ठहरी हुई शांति, पर निगाहों में लहराता समंदर,
मानो मुस्कान की तहों में कहीं छिपा कोई अंदर का मंथन हो।
ये आँखें…
जैसे हर सवाल का जवाब ख़ुद ही छुपाए बैठी हों,
जैसे कह रही हों
“हमने बहुत कुछ देखा है,
पर अभी बहुत कुछ कहना बाकी है।”
हाथों पर टिके वो पल,
और चेहरा थोड़ा-सा झुका हुआ,
तस्वीर में भी एक धड़कन
जो धीरे से फुसफुसाती है कि ख़ामोशी भी बोलती है।
वाह बढ़िया 👌🏻
👍 thanks
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .. खामोशी भी बोलती है 👌👌