ठहरे हुए लफ़्ज़
यह भावपूर्ण कविता उन अनकहे लफ़्ज़ों की कहानी कहती है, जो मन में ठहर तो जाते हैं, लेकिन सही समय और अभिव्यक्ति न मिलने पर अंतस की गहराइयों में कहीं खो जाते हैं।

यह भावपूर्ण कविता उन अनकहे लफ़्ज़ों की कहानी कहती है, जो मन में ठहर तो जाते हैं, लेकिन सही समय और अभिव्यक्ति न मिलने पर अंतस की गहराइयों में कहीं खो जाते हैं।
इन आँखों की ख़ामोशी में एक दबी हुई रागिनी है अनकहे शब्दों की, आधी छूटी कहानियों की। चेहरे पर ठहरी शांति और निगाहों में उठते-गिरते समंदर के बीच एक गहरा मंथन छुपा है। ये आँखें जैसे हर सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे बैठी हों, मानो कह रही हों कि उन्होंने बहुत कुछ देखा है… पर कहने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।