
प्रमिला त्रिवेदी
माँ-बेटी का नाता है सबसे अनमोल,
इसमें छिपे हैं ममता के मीठे बोल।
बिन कहे ही मन की बात समझ जाती,
माँ तो बेटी की आँखों में दुनिया पढ़ जाती।
बेटी जब पहली बार माँ की गोद में आती,
माँ की सूनी दुनिया फूलों-सी मुस्काती।
नन्हे-नन्हे कदमों से जब आँगन महकाती,
उसकी एक हँसी माँ की थकान मिटाती।
कभी माँ बनकर उसे राह दिखाती,
कभी सहेली बनकर दिल की बात सुनाती।
बेटी के हर सपने में माँ की दुआ होती,
उसकी हर खुशी में माँ की खुशी होती।
फिर एक दिन बेटी अपना घर बसाती है,
माँ की आँखों में चुपके से नमी आती है।
दूर चली जाए बेटी, तो क्या हुआ,
माँ का आशीष तो हर पल उसके साथ रहा।
बेटी भी कहाँ माँ से दूर हो पाती है,
हर खुशी में सबसे पहले माँ याद आती है।
माँ की आवाज़ सुनते ही मन खिल जाता है,
जैसे बचपन फिर से पास चला आता है।
ये रिश्ता न दूरी से कम होता है,
न समय के साथ कभी खत्म होता है।
माँ-बेटी का प्रेम तो उस दीपक जैसा है,
जो दूर रहकर भी दोनों के मन में जलता रहता है।
माँ है तो बेटी के पास दुआओं का संसार,
बेटी है तो माँ के जीवन में बहार।
सच ही तो है—दुनिया में रिश्ते बहुत हैं,
पर माँ-बेटी का नाता सबसे अनमोल है।
