
पूनमसिंह वत्सला, जमशेदपुर
मेरी ख़ामोशियों को समझ जाता है वो,
मन बहलाए तब न।
मेरी हँसी के पीछे का दर्द समझ लेता है वो।
मेरा चेहरा देखकर सब समझ जाता है वो,
कुछ बतलाए तब न।
बिना बोले, बिन कहे सब कुछ समझ जाता है वो।
मेरी प्रार्थना की वजह भी समझ जाता है वो,
दृग महकाए तब न।
अनजाने में भी मेरी ख़ुशबू समझ जाता है वो।
पायल की खनक से मुझे पहचान जाता है वो,
पथ सरसाए तब न।
देहरी पर मेरी परछाई पहचान जाता है वो।
तलाशती हूँ उसे, तब समझ लेता है वो,
सुर खनकाए तब न।
मेरी हरकतों से मुझे समझ लेता है वो।
किशन है वो मेरे मन का, ऐसे कहता रहता है वो,
हल समझाए तब न।
मैं उसकी राधिका हूँ, ऐसा समझता रहता है वो।
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