नीरजा श्रीवास्तव की दो कविताएं

डॉ.(श्रीमती) नीरजा श्रीवास्तव ‘नीरू’, फरीदाबाद (हरियाणा)
इतने मज़हब इस जहान में,
गीता, बाइबल और कुरान।
पर दहशतगर्दी हर जगह,
जगह-जगह वहशत, शैतान।
हिन्दू, ईसाई या मुसलमान,
यूँ तो हैं सारे धर्म महान।
पर रेप और क्राइम जो रोक सके,
सोचो, कहाँ है वो भगवान?
किस धर्म का है वो भगवान?
सोचें, क्यों नहीं हम इंसान?
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बिटिया
सपना आत्मनिर्भर बनने का डालो बिटिया में,
सज-संवर दुल्हन बन पराए घर जाने का नहीं।
लिख दो संकल्प उसके जीवन की चिट्ठिया में,
सहारा देने योग्य ही बने, आश्रिता बनने का नहीं।
लेखिका के बारे में-
डॉ. (श्रीमती) नीरजा श्रीवास्तव ‘नीरू’
हिंदी साहित्य जगत का एक सशक्त और सम्मानित नाम हैं। संस्कृत साहित्य में एम.ए. एवं पीएचडी उपाधि प्राप्त डॉ. नीरजा पिछले चार दशकों से स्वतंत्र हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। उनकी लेखनी ने कहानी, कविता, गीत, ग़ज़ल, लेख, बाल साहित्य तथा काव्यानुवाद जैसी विविध विधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में कहानी संग्रह ‘अनबॉक्स ज़िंदगी’ विशेष रूप से चर्चित रहा है। इसके अतिरिक्त ‘माइक्रोवेव आसान रेसिपी : लुभावनी डिशें’, ‘बीरबल के 50 किस्से’, तथा ‘राष्ट्र भाषा भारती’ (भाग 3, 4 एवं 5) जैसी पुस्तकें पाठकों के बीच लोकप्रिय रही हैं।
वे ‘काव्य अंकुर’ और ‘कथा प्रदेश’ जैसे साझा संग्रहों में भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं सरिता, गृहशोभा, मुक्ता, सरस सलिल, मेरी सहेली, वनिता, गृहलक्ष्मी तथा हिंदुस्तान टाइम्स ‘अंगना’ में उनकी अनेक कहानियाँ, कविताएँ, गीत, ग़ज़लें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
उनकी रचनाओं का प्रसारण लखनऊ रेडियो स्टेशन से भी हुआ है। डिजिटल माध्यमों पर भी उनकी सृजनशीलता उल्लेखनीय है। किंडल पर ‘भगवद्गीता’ का काव्यानुवाद और बाल-कथाएँ, तथा यूट्यूब, स्टोरीटेल और दिल्ली प्रेस वेब पर उनकी वॉइसओवर कहानियाँ—‘सही पकड़े हैं’, ‘ताक-झांक’, ‘बिन सजनी घर’ और ‘बैकुंठ’ श्रोताओं द्वारा सराही गई हैं। उनके यूट्यूब चैनलों पर गीत और कहानियाँ निरंतर पाठकों-श्रोताओं तक पहुँच रही हैं।
ऑनलाइन साहित्य मंच प्रतिलिपि पर उनके लेखन को 1,40,000 से अधिक पाठकीय व्यूज़ और लगभग 400 समीक्षाएँ प्राप्त हो चुकी हैं, जो उनकी लोकप्रियता और पाठकों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। अनेक साहित्यिक सम्मान, प्रमाण-पत्र और ट्रॉफियों से अलंकृत डॉ. नीरजा श्रीवास्तव ‘नीरू’ की लेखनी संवेदना, सामाजिक सरोकार और जीवनानुभवों की सजीव अभिव्यक्ति है। उनकी रचनाएँ पाठकों के मन को केवल स्पर्श ही नहीं करतीं, बल्कि उन्हें सोचने और महसूस करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
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मन की आवाज़
रुह का रिश्ता
