जीवनसाथी

An elderly Indian couple lovingly sharing food from the same plate while their family watches emotionally inside a middle-class home.

नीरजा कृष्णा, पटना

“अरे जल्दी से इधर आओ…देखो बाबू जी और अम्मा एक ही थाली में खाना खा रहे हैं…।”
सुभाष हैरानी से देखते हुए बोला,
“अरे यार! बाबू जी कितने लाड़ से अम्मा के मुॅंह में कौर डाल रहे हैं। अम्मा तो नवेली दुल्हन की तरह शरमा भी रही हैं…।”

बेटा सुभाष और बहू मालिनी बहुत आश्चर्यचकित होकर उनका यह नया अवतार देख कर चुपके चुपके मखौल भी उड़ा रहे थे। तभी वहां बड़े भाई राजेश का परिवार भी पहुंच गया। बड़ी बहू नंदिनी अम्मा बाबू जी को देख कर बहुत मर्माहत होकर बोली,
” हाय, आज मुझे अपनी स्वार्थी सोच पर बेहद शर्मिन्दगी महसूस हो रही है।”
सभी लोग आश्चर्य से उसका चेहरा देखने लगे। वो उसी तरह आवेश में थी,
” हम अम्मा बाबू जी की जिंदगी का फैसला करने वाले कौन होते हैं…जीवन भर आप दोनों भाइयों के लिए बाबूजी बाहर नौकरी करते रहे और अम्मा बेचारी घर परिवार और आप लोगों की पढ़ाई के लिए यहीं बनी रहीं।”

तभी मालिनी बीच में बोल पड़ी,
” दीदी, आप कहना क्या चाह रही हैं। उस समय की परिस्थितियों में इन लोगों ने भी जो उचित लगा, वही किया। इसमें इतना सोचने वाली क्या बात है?”
नन्दिनी तड़प गई,
” हमलोगों को अपने माता-पिता का त्याग नहीं दिख रहा। अब रिटायरमेंट के बाद दोनों को एक दूसरे का थोड़ा साथ मिला है ,तो हमलोग उन्हें जुदा करने के लिए कमर कस बैठे हैं।”
राजेश और सुभाष दोनों की नज़रें झुक गईं। दोनों एक साथ बोल पड़े,
” उम्र के इस पड़ाव पर हमारे बाबू जी और अम्मा एक साथ ही रहेंगे। हम अपने बच्चों और घर की देखभाल के लिए इन्हें अलग कर रहे थे।”
तभी बाबू जी की नज़र अपने बच्चों पर पड़ गई और वे दोनों झेंप कर थाली खिसकाते हुए उठने लगे। मालिनी दौड़ कर उनके लिए पानी ले आई और अम्मा जी को पानी पिलाते बोली,
” अम्मा जी, अब आप मेरे साथ अकेले नहीं चल रही हैं और बाबूजी भैय्या जी के साथ अकेले नहीं जाएंगे। आप दोनों अब साथ साथ ही रहेंगे,साथ साथ घूमते फिरते रहेंगे। ठीक है न…?”

इस बार अम्मा मुस्कुरा कर बोलीं,
“संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करके पति पत्नी को अलग रखना गैरकानूनी है। जीवनसाथी के साथ रहना राइट टू लिव टुगेदर के अंतर्गत आता है भई…।”
दोनों बेटे बहू और बच्चे उनसे लिपट कर खिलखिला पड़े।

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