वृद्धाश्रम के कमरे में खिड़की के पास बैठी एक वृद्ध माँ, आँखों में आँसू और हाथों में परिवार की पुरानी तस्वीर, बाहर दीपावली की रोशनी और भीतर गहरा अकेलापन।

टूट जाती हूँ जब…

वृद्धाश्रम में रह रही एक माँ के मन की पीड़ा, बच्चों के प्रति अटूट प्रेम और उपेक्षा के दर्द को अभिव्यक्त करती यह मार्मिक कविता पाठकों को रिश्तों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है।

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An elderly Indian couple lovingly sharing food from the same plate while their family watches emotionally inside a middle-class home.

जीवनसाथी

जीवन भर परिवार के लिए त्याग करने वाले अम्मा और बाबूजी को रिटायरमेंट के बाद एक-दूसरे का साथ मिला, लेकिन बच्चे उन्हें अलग करने की सोच रहे थे। यह भावुक कहानी रिश्तों, प्रेम और जीवनसाथी के अधिकार का मार्मिक संदेश देती है।

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