बेज़ार मुहब्बत

अकेला व्यक्ति खामोशी में बैठा हुआ, जो मुहब्बत और जज़्बातों के दर्द को महसूस कर रहा है

कंचनमाला अमर “उर्मी” नई दिल्ली

बेज़ार मुहब्बत में हो जाना नहीं अच्छा,
जो जा ही चुका, उसको बुलाना नहीं अच्छा।

एहसास की खुशबू को दिलों में ही छुपा रख,
जज़्बात ज़माने को दिखाना नहीं अच्छा।

हर बात पे कहते हो कि नादान हो बहुत तुम,
हर बात अना में ही बताना नहीं अच्छा।

पर्दे में ही रहने दो, जो गर बात हो ऐसी,
हर बात में यूँ बात बनाना नहीं अच्छा।

मत माँग सिला लोगों से नेकी का तो बंदे,
एहसान यूँ नेकी का जताना नहीं अच्छा।

लेखिका के बारे में-

कंचनमाला ‘अमर’ (उपनाम: उर्मी) 
एक बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न साहित्यकार एवं शिक्षिका हैं, जो नई दिल्ली के राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान विषय का अध्यापन करती हैं। उन्होंने M.Sc. (रसायन शास्त्र), M.Ed, M.A (कंठ संगीत) तथा B.A (कत्थक नृत्य) की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में शिक्षा शास्त्र में शोधरत हैं।
उनका एकल काव्य संग्रह “इसी रहगुज़र से” सहित कई साझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं तथा अनेक प्रतिष्ठित पत्र–पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें माखनलाल चतुर्वेदी नव उदय साहित्य सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।


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