बेज़ार मुहब्बत
मुहब्बत में हर एहसास जताना जरूरी नहीं, कुछ जज़्बात दिल में ही रहने में बेहतर होते हैं।

मुहब्बत में हर एहसास जताना जरूरी नहीं, कुछ जज़्बात दिल में ही रहने में बेहतर होते हैं।
यह ग़ज़ल सिर्फ मोहब्बत की कहानी नहीं, बल्कि खुद से मिलने का एक सफर है। इसमें हिज्र का दर्द है, सब्र की तपिश है और बदलते रिश्तों की कड़वी सच्चाई भी।