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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति, मन की थकान और अकेलेपन को दर्शाता दृश्य

“मन थके तो कौन?”

मन की थकान वह पीड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। “मन थके तो कौन?” कविता इसी अदृश्य दर्द को उजागर करती है, जहाँ तन की बीमारी का इलाज तो मिल जाता है, लेकिन मन के घाव केवल एक सच्चे अपने की उपस्थिति से ही भरते हैं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सबसे बड़ा सहारा सिर्फ सुनने वाला एक दिल होता है।

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“खिड़की के पास बैठी भावुक महिला”

मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम

“मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम” एक बेहद भावनात्मक हिंदी कविता है, जो अनकहे जज़्बातों और रूहानी प्रेम की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह कविता उन भावनाओं की कहानी है, जिन्हें शब्दों में कहना मुश्किल होता है, लेकिन दिल उन्हें गहराई से महसूस करता है।

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