सीकर में बजाज ट्रस्ट के ध्येय महोत्सव का भव्य शुभारंभ
राजस्थान के सीकर में सातवें “ध्येय महोत्सव” का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में ग्रामीण विकास, फसल विविधीकरण, बागवानी और आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण पर विचार साझा किए गए। बजाज फाउंडेशन, जमनालाल कनिराम बजाज ट्रस्ट और विश्व युवक केंद्र के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव ग्रामीण सशक्तिकरण और सतत विकास के लिए प्रेरक मंच बन गया। आगामी दिनों में कार्यशालाएँ और फील्ड विज़िट्स आयोजित की जाएँगी।
महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र
श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।
खामोश मोहब्बत
कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।
जीवन एक- वचन नहीं है
जीवन एक-वचन नहीं है। यह दो पत्थरों के रगड़ से जन्मी आग की तरह है—जहाँ दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे को प्रकाशित करता है। यह टकराहट नहीं, रचना है। हम सबके अनुभव अलग हैं, फिर भी जुड़ाव की ज़रूरत अपरिहार्य है। पर आज, हम सिर्फ़ व्यूज में हैं, अंतर्बोध में नहीं। जो घटित हो रहा है, वह केवल घटना नहीं, संवेदना है—लेकिन हम ठहरते नहीं, स्क्रॉल करते जाते हैं।
हिंदी को ही राष्ट्रभाषा होनी चाहिए
जब 1947 में देश को आज़ादी मिली, तब भाषा की बड़ी चिंता खड़ी हुई। हमारा भारत एक विशाल देश है, जहाँ विविध संस्कृतियाँ हैं, सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती हैं, और हज़ारों बोलियाँ भी हैं। हर राज्य की अनेक मातृभाषाएँ हैं। ऐसे विशाल देश को आज़ादी के बाद निवास करने वाले असंख्य भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों को एक साथ मिलाने का प्रयास भारत की नवनिर्माण सरकार कर रही थी। जबकि हमारे देश के पास स्वयं की कोई राष्ट्रीय भाषा ही नहीं थी।
डॉ. संजुला सिंह को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
जमशेदपुर की वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार डॉ. संजुला सिंह “संजू” को नेपाल की संस्था द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा सम्मान रत्न 2026 से सम्मानित किया गया। महिला दिवस के अवसर पर उन्हें साहित्य और मातृभाषा के संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।
मुंबई में ‘बतरस’ ने रचा प्रेम का बहुरंगी महोत्सव
बतरस’ द्वारा आयोजित ‘है प्रेम जगत में सार’ कार्यक्रम में कवि विनोद दास ने प्रेम को सांस्कृतिक प्रतिरोध बताते हुए समाज में संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। कविता, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने शाम को यादगार बना दिया।
