पुणे में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक होम डिलिवरी महंगी
पुणे में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक घर तक मंगवाने की सुविधा अब महंगी हो गई है। परिवहन विभाग ने होम डिलिवरी शुल्क 58 से बढ़ाकर 70 रुपये कर दिया है।

पुणे में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बुक घर तक मंगवाने की सुविधा अब महंगी हो गई है। परिवहन विभाग ने होम डिलिवरी शुल्क 58 से बढ़ाकर 70 रुपये कर दिया है।
“मैं ही उजाला, मैं ही अँधेरा हूँ, मैं ही ख़ुशी, मैं ही दुःख हूँ…”जब इंसान खुद को पूरी तरह स्वीकार कर लेता है,तो उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रह जाती. वह खुद में ही एक पूरी दुनिया बन जाता है।
सविता सिंह मीरा से हुई एक साहित्यिक मुलाकात धीरे-धीरे बहन और दोस्त के आत्मीय रिश्ते में बदल गई। उनकी सहजता, साहित्य के प्रति समर्पण और स्नेहिल स्वभाव को याद करते हुए यह संस्मरण मीरा दी के साथ जुड़ी खूबसूरत यादों और उस अपनापन को सामने लाता है, जो उन्हें खास बनाता है।
बौद्ध और जैन आस्था के लिए प्रसिद्ध राजगीर की शांत धार्मिक नगरी शुक्रवार को उस वक्त सन्नाटे में बदल गई, जब दिगंबर जैन धर्मशाला के एक कमरे से चार पर्यटकों के शव बरामद किए गए. अंदर से बंद कमरे में दो पुरुष और दो महिलाओं के शव फंदे से लटके मिले.
“पराया धन” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि वह सामाजिक सोच है जो बेटियों को अपने ही घर में अस्थायी महसूस कराती है। यह लेख स्त्री की स्वतंत्र चेतना, आत्मसम्मान और भावनात्मक सबलता की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है और समाज से आग्रह करता है कि बेटियों को संपत्ति नहीं, स्वतंत्र व्यक्तित्व की तरह देखना सीखे।
कुछ पुरुष रिश्ते बड़ी आसानी से बनाते हैं और उतनी ही सहजता से तोड़ भी देते हैं. बिना किसी स्पष्टीकरण, बिना किसी टकराव के वे चुप्पी को हथियार बनाकर स्त्री को खुद ही रिश्ते से बाहर निकलने को विवश कर देते हैं. यह लेख उसी मौन छल, टूटते विश्वास और उस स्त्री की मानसिक पीड़ा की कहानी है, जो प्रेम को ईश्वर मान बैठती है और अंत में स्वयं को ठगा हुआ पाती है.
“पैंतीस-चालीस की स्त्री—घर की रौनक, रिश्तों की संरक्षक, प्रेम और वात्सल्य की सजीव प्रतिमूर्ति। बिना किसी दवा या शौक के, जीवन में खुशियाँ और आशा फैलाती। सच में, ये स्त्री कितनी खूबसूरत होती है।”
शेयर बाजार में अधिक रिटर्न का लालच देकर 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक से 22 करोड़ रुपये की साइबर ठगी. ठाणे और छत्रपति संभाजीनगर से चार आरोपी गिरफ्तार.
Excerpt:
“क्या फर्क है तुममें और मुझमें” स्त्री जीवन के दो अलग अनुभवों की पड़ताल करती कविता है. मेकअप और सादगी, डर और बेबाकी, सुविधा और संघर्ष के बीच यह कविता स्त्री की अपनी पहचान और आत्मसम्मान को स्वर देती है.
यह ग़ज़ल प्रेम, किस्मत, दौलत और आत्मसम्मान पर उठते सवालों की दास्तान है, जहाँ हर शेर जीवन की सच्चाई से रू-बरू कराता है।