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मुंबई में सजा ‘उत्सव शब्दों का’

मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आर के ओपन माइक ‘उत्सव शब्दों का’ कार्यक्रम में मंच पर प्रस्तुति देते प्रतिभागी और उपस्थित साहित्यकार

आर के ओपन माइक में 50 से अधिक रचनाकारों ने बहुभाषी प्रस्तुतियों से बांधा समां

मुंबई से प्रसिद्ध लेखिका रीमा राय सिंह की रिपोर्ट

मुंबई। आर के पब्लिकेशन द्वारा आयोजित आर के ओपन माइक “उत्सव शब्दों का” का भव्य साहित्यिक आयोजन शनिवार, 28 फरवरी 2026 को मुंबई मराठी पत्रकार संघ, दक्षिण मुंबई में संपन्न हुआ। किसी प्रकाशन संस्थान द्वारा दक्षिण मुंबई में इस प्रकार का आयोजन पहली बार आयोजित किया गया, जिसे ऐतिहासिक पहल के रूप में सराहा गया।

इस विशेष साहित्यिक समारोह में साहित्य के विविध रंगों के साथ हर आयु वर्ग की प्रतिभाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम को तीन सत्रों में विभाजित किया गया था। निर्णायकों के नवरंगी समूह में लखनऊ से पधारे प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. पंकज प्रसून, अर्चना जौहरी, महेश दुबे, मनमोहन धीर, डॉ. कृष्ण कुमार मिश्र, पवन, ओबैद आज़म आज़मी, गुलशन मदान तथा डॉ. सुधीर चौबे की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में पचास से अधिक प्रतिभागियों ने कविता, कहानी, ग़ज़ल और अन्य साहित्यिक विधाओं के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। मंच पर “मंच एक, भाषा अनेक” की अवधारणा को साकार करते हुए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी, मराठी और अवधी भाषाओं में भी शानदार प्रस्तुतियाँ दी गईं। सभी प्रतिभागियों को विशेष रूप से तैयार स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का सुंदर संयोजन रीमा राय सिंह ने किया, जबकि संचालन की जिम्मेदारी डॉ. वर्षा महेश ने प्रभावी ढंग से निभाई। आयोजन में इसरा विद्यालय के ट्रस्टी आदर्श शुक्ला, ताराचंद मकसाने और मनमोहन धीर का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम की डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियो कवरेज संजय रोकड़े एवं उनकी टीम ने किया।

आर के पब्लिकेशन के निदेशक एवं आयोजक रामकुमार ने इस अवसर पर कहा कि जब से वे पुस्तकों का प्रकाशन कर रहे हैं, तभी से उनके मन में पाठकों को पुस्तक-पठन के लिए प्रेरित करने की इच्छा रही है। उनका मानना है कि “जब लोग अच्छा कहते हैं, तो वे अच्छा पढ़ते भी हैं।” इसी विचार को साकार रूप देने के लिए आर के ओपन माइक की संकल्पना को आकार दिया गया, ताकि कहने और पढ़ने की परंपरा निरंतर बनी रहे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मायानगरी मुंबई में इस साहित्यिक पहल को साहित्य प्रेमियों का सतत सहयोग मिलता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएँ दीं और भविष्य में ऐसे और साहित्यिक आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की।

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