जन जन के मन में है उल्लास उमंग ये न्यारा
मना रहे है आजादी का अमृत उत्सव प्यारा
सुर्य उदीत हुआ है देखो नंदन कानन में सुनहरा
लहराया तिरंगा हर घर केसरिया आकाश सारा
चारों ओर छायी खुशियाँ हर मन में देशराग भरा
झूम उठा है देखो भारत फिर से एक बार ये सारा
पर आजादी मुफ्त नहीं थी ध्यान रखें हम ये जरा
नीति कुशलता के दम पर भारत में उसने पैर जमाए
सोने की चीडिया के घर अब हर दिन लूटपाट वो मचाए
फूट डाल वो राज करते रहे धर्मों पर आयी बलाएं
मनों में गिरी थी गाज और हो गए हम हमीं से पराए
देख रहे थे सपने जो आजादी के वीर महान
लगा रहे थे बाजी जान की लेकर हथेलियों में प्राण
खबर नहीं थी उनको भी तो इसकी कानोकान
आजादी के साथ मिलेगा बंटवारे का फरमान
मत भूलो इस हासिल में मीटी कितनों की जवानियां
बंटवारे में छीपी हुई है कई अनसुनी कहानियां
दुख करुणा आतंक दर्द से छायी थी गुमनामियां
असंतोष आक्रोश क्रोध की धधक रही थी चिंगारियां
विभाजन विस्थापन की तुम तह तक जाकर देखो
साथ निभाने वालों ने ही कैसे ये लूटे घरद्वार देखो
मानवता की पूंजी पर हावी पशुता की मिसाल देखो
हिंसा का बोलबाला यहां अहिंसा का ढकोसला देखो
आनेवाली पीढीयों को यह सच तुम बतलाओ
हो गया है भारत खंडित नफरत हिंसा की आड में
आओ मिलकर लें शपथ करें प्रण अपने मन में
आओ बनाएँ इसे अखंडित इतिहास रचे फिर से जग में
जलती रहे देशभक्ति की ज्वाला उनके भी सीने में
अखंड भारत का ये सपना वो भी संजोए मन में

डॉ. मीना मुक्ति, प्रसिद्ध साहित्यकार लातूर
