Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
त्रिमूर्ति हाई स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तिरंगा फहराते अतिथि और विद्यार्थी

त्रिमूर्ति हाई स्कूल में गूंजा देशभक्ति का स्वर

त्रिमूर्ति हाई स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के साथ आयोजित हुआ. विद्यार्थियों ने गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया.

Read More
पिंजरे से खुले आकाश की ओर उड़ता पक्षी स्वतंत्रता और आजादी का प्रतीक

स्वतंत्रता..

स्वतंत्रता हर व्यक्ति की मूल आकांक्षा है, लेकिन इसकी अपनी एक सीमा और जिम्मेदारी भी होती है. यह लेख आजादी, रिश्तों, विचारों की स्वतंत्रता और ‘जिएँ और जीने दें’ के मानवीय संदेश पर विचार करता है.

Read More
Image Alt Text: स्वतंत्रता दिवस के जश्न के बीच आम आदमी की जिंदगी और सामाजिक विडंबना दर्शाती हिंदी कविता

आज़ादी का सच

आज़ादी के जश्न, तिरंगे और देशभक्ति के नारों के बीच यह रचना आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों और सामाजिक विडंबनाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है.

Read More
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के साथ देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी का संदेश

हमने देश को क्या दिया ?

देश ने हमें आजादी, स्वाभिमान और विकास का अवसर दिया. लेकिन क्या हमने अपने देश को उतना ही लौटाया? स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और सच्ची देशभक्ति पर आत्ममंथन करता यह लेख.

Read More

साहित्य कला चौपाल द्वारा सम्मान समारोह संपन्न

पुराना कोर्ट परिसर में 15 अगस्त 2025 को सायं 4:30 बजे से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर काव्य मंच साहित्य कला चौपाल के बैनर तले एक गरिमामय सम्मान समारोह सह काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का संयोजन मंच की संस्थापक-अध्यक्ष अनीता सिंह, महासचिव कृष्णा दीदी एवं सचिव निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी के नेतृत्व में हुआ. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्या वाचस्पति सम्मान के अंतर्गत साहित्यकारों का सम्मान रहा. हरिद्वार में प्राप्त इस प्रतिष्ठित सम्मान की निरंतरता स्वरूप तीन वरिष्ठ साहित्यकारों सविता सिंह मीरा, निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी एवं अरविंद तिवारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया.

Read More

तिरंगा – हमारा मान

भारत में “तिरंगा” शब्द भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को संदर्भित करता है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना ध्वज होता है, जो उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में और उसके बाद भारत गणराज्य के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कार्य करता रहा।

Read More

आजादी का कृष्णपक्ष

आजादी का कृष्णपक्ष**” में कवि स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की उमंग और उल्लास का चित्रण करते हुए हमें याद दिलाता है कि यह आजादी सहज या मुफ्त में नहीं मिली थी। नीति-कुशलता और योजनाओं के बल पर विदेशी शक्तियों ने भारत में अपने पैर जमाए और “सोने की चिड़िया” के घर में लूटपाट मचाई। फूट डालकर शासन करने की नीति ने धर्मों पर संकट और आपसी विभाजन की आग फैलाई।आजादी के स्वप्न देखने वाले वीरों ने प्राणों की आहुति दी, परंतु उन्हें यह आभास भी नहीं था कि स्वतंत्रता के साथ ही देश को बंटवारे का फरमान मिलेगा। इस उपलब्धि में असंख्य जवानियों की कुर्बानी और बंटवारे में छुपी अनेक अनसुनी कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें दुख, करुणा, आतंक और दर्द की गहरी परतें छिपी हैं। विभाजन और विस्थापन के दौरान साथ निभाने वालों ने ही घर-द्वार लूट लिए, मानवता पर पशुता हावी हो गई, हिंसा ने अहिंसा को ढक लिया। कवि आने वाली पीढ़ियों को यह सच्चाई बताने का आग्रह करता है कि भारत नफरत और हिंसा की आड़ में खंडित हुआ।

Read More