टूटे दिल वाली स्त्री खामोशी से अंधेरे कमरे में बैठी हुई, आंखों में दर्द और विश्वासघात का भाव

मेरा संसार

यह कविता एक ऐसे टूटे हुए मन की आवाज़ है, जिसने अपने पूरे संसार को एक ही व्यक्ति में समेट लिया था. भरोसे, प्रेम और समर्पण के बदले उसे झूठ, छल और दर्द मिला. यह रचना विश्वास के टूटने से उपजे आंतरिक संघर्ष, पीड़ा और आत्मबोध को बेहद मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है

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सच्चा साथी, सच्चा प्रेम

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम, स्नेह और जीवनसाथी के साथ जुड़े भावनात्मक अनुभव को उजागर करती है। इसमें प्यार की गहराई, भरोसा और साथी के साथ जीवन भर निभाए गए रिश्ते की मिठास को सरल और असरदार भाषा में व्यक्त किया गया है।

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भागती जिंदगी और खालीपन को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें समय की कमी, धन की दौड़ और सुकून से दूर होता आधुनिक मनुष्य दिखाई देता है

खाली हाथ जाना है…

यह कविता आधुनिक जीवन की भागदौड़, दौलत की अंधी दौड़ और सुकून से दूर होते इंसान की विडंबना को उजागर करती है। “मेरी-मेरी” में उलझे मनुष्य की मानसिकता और खोते मानवीय संबंधों पर यह एक गहरी, आत्ममंथन कराती हुई टिप्पणी है।

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कविता और किताब को प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्शाता भावनात्मक दृश्य, जिसमें शब्दों के माध्यम से स्नेह और आत्मीयता का एहसास झलकता है

उपहार में शब्द

यह कविता उपहारों से परे शब्दों के स्नेह को महत्व देती है, जहाँ प्रेम फूलों या वस्तुओं में नहीं, बल्कि लिखी और पढ़ी गई कविताओं तथा किताबों के भावनात्मक स्पर्श में बसता है।

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मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

पोइसी टेल्स समूह द्वारा ११ जनवरी २०२६ को मुंबई के मुलुंड पश्चिम में आयोजित वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में देशभर से आए रचनाकारों ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

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मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया”

मोबाइल की दुनिया

मोबाइल आज ज्ञान, संचार और सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधाधुंध उपयोग ने रिश्तों, बचपन और मूल्यों को संकट में डाल दिया है। चन्द्रवती दीक्षित की यह कविता तकनीक और विवेक के बीच
संतुलन की ज़रूरत को गहराई से उजागर करती है।

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Softly lit close-up of two Indian hands gently reaching toward each other without touching, expressing emotional connection, trust, and respectful intimacy in a calm, warm-toned setting.

स्पर्श : संवेदना का संगीत

कुछ स्पर्श शरीर को नहीं, मन को छूते हैं। वे न वासना जगाते हैं, न भय बस भीतर कहीं भरोसे की लौ जला देते हैं। मर्यादा में बंधे ऐसे स्पर्श रिश्तों को शब्दों से पहले समझा देते हैं और इंसान को इंसान होने का एहसास कराते हैं।

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सर्दियों की ठंडी सुबह का यथार्थ दृश्य, हल्की धुंध से ढकी भारतीय गली, शॉल और ऊनी कपड़ों में लिपटे लोग, आग के पास हाथ सेंकते बुजुर्ग, चाय के कप लिए महिलाएं और जैकेट पहने बच्चे.

सर्दी का मौसम

ठंडी हवा ने जैसे पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया था. सुबह की धुंध गलियों में चुपचाप उतर आई थी और सूरज की किरणें मानो रास्ता तलाश रही थीं. लोग शॉल और स्वेटर में सिमटे, कदम धीरे-धीरे बढ़ा रहे थे. हर मोड़ पर चाय की भाप उठती दिखती थी, जो ठिठुरते बदन को थोड़ी राहत देती थी. कहीं बुजुर्ग आग के पास हाथ सेंकते नजर आते, तो कहीं बच्चे ठंड से सिकुड़ते हुए भी स्कूल की राह पकड़ते थे. यह सर्दी केवल मौसम नहीं थी, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चाल को थाम लेने वाली एक खामोश ताकत बन चुकी थी.

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फुसफुसाहटों का ज़हर

जब शब्द हथियार बन जाएँ और फुसफुसाहटों में ज़हर घुलने लगे, तब एक स्त्री का सच बोलना केवल आत्मरक्षा नहीं रहता, वह समाज को आईना दिखाने का साहस बन जाता है। अपनी कहानी कहकर वह न सिर्फ़ स्वयं को मुक्त करती है, बल्कि उन अनकही चुप्पियों को भी तोड़ देती है, जिनमें अपराध पनपते हैं।

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शब्दों में बंधा मेरा दिल

तुम्हारी लिखी हर पंक्ति ने मुझे भीतर तक छू लिया। तुम्हारे शब्दों में गंभीरता और स्त्री‑सम्मान की झलक थी। धीरे‑धीरे तुम्हारा व्यक्तित्व मेरे मन में उतर गया, और अब मुझे लगता है कि मैं तुम्हारी लेखनी की प्रेयसी बन चुकी हूँ। हर रोज़ तुम्हारा लिखा पढ़ना, मेरे लिए एक नयी दुनिया की खोज और प्रेम का अनुभव है।

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