खामोश बैठी महिला, समाज की बंदिशों और अंदरूनी घुटन को दर्शाती हुई

तुम चुप रहो

“तुम चुप रहो” एक तीखी और प्रभावशाली हिंदी कविता है, जो समाज में दबाई गई आवाज़ों, विशेषकर महिलाओं की घुटन और संघर्ष को दर्शाती है। यह रचना सवाल उठाती है क्या चुप रहना ही समाधान है या अन्याय के खिलाफ बोलना जरूरी है?

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एक रोमांटिक दृश्य जो प्रेम, एहसास और दिल की गहराई को दर्शाता है

सुनो साहिब…

“सुनो साहिब” एक कोमल और गहरी भावनाओं से भरी कविता है, जो प्रेम के उस एहसास को व्यक्त करती है जहाँ दो दिल धीरे-धीरे एक-दूसरे में समाने लगते हैं। यह रचना बताती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर सांस, हर धड़कन और हर ख्वाब में बस जाता है। जब मोहब्बत अपनी गहराई पर पहुँचती है, तो इंसान खुद को भी अपने प्रिय के भीतर खोजने लगता है। यह कविता समर्पण, अपनापन और आत्मीय जुड़ाव की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।

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मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन के कवि सम्मेलन में मंच पर उपस्थित कवि और अतिथि

मुंबई में सजी साहित्य की महफिल

मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह में साहित्यकारों, कलाकारों और समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

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चाँदनी रात में हवा में लहराते लंबे बालों वाली महिला, जिसके आसपास भावनात्मक और रहस्यमयी माहौल है

जुल्फ़ तेरी

तेरी जुल्फ़ों की खुशबू और उनकी नरम छाँव में जैसे मैं खुद को भूलता चला गया। तेरी मौजूदगी में ऐसा सुकून मिला, मानो पूरी कायनात सिमटकर एक एहसास बन गई हो। लेकिन उसी चाँदनी रात में, जब भावनाएँ शब्दों में ढल रही थीं, कुछ ऐसा हुआ कि सारी इबारतें जलकर राख हो गईं। अब बस एक खामोशी, कुछ अधूरे जज़्बात और एक अनकहा सवाल रह गया है, जो आज भी दिल के किसी कोने से मुझे चुपचाप देखता है।

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गांव के खेतों और कच्चे रास्ते के बीच खड़ा एक व्यक्ति, जो बचपन की यादों में खोया हुआ है

गांव की माटी की वो खुशबू

शहर की भीड़ और ऊँची इमारतों के बीच खड़े होकर भी मन बार-बार उसी गांव की ओर लौट जाता है, जहाँ माटी की खुशबू, माँ के हाथों की गरमाहट और रिश्तों की सच्चाई आज भी दिल में ज़िंदा है।

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राम भक्त हनुमान दिव्य छवि

राम भक्त हनुमान

राम भक्त हनुमान पर आधारित यह भावपूर्ण हिंदी कविता उनकी भक्ति, शक्ति और संकट मोचन स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। पवनपुत्र की महिमा को समर्पित यह रचना आस्था और श्रद्धा से भर देती है।

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