अपनी राह: अँधेरे से उजाले तक
दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।

दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।
प्रेम, दूरी और अधूरे जज़्बातों से सजी यह हिंदी कविता रिश्तों की खामोशियों, तड़प और अनकही बातों का भावपूर्ण चित्रण करती है।
यह कविता जीवन के दर्द, संघर्ष, कर्म और उम्मीद की भावनात्मक यात्रा को शब्द देती है। संवेदनाओं, हौसलों और आत्मिक प्रकाश से भरी यह रचना जीवन-दर्शन की गहरी अनुभूति कराती है।
अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…
“मंटो… सच आज भी वही है दोस्त…” समाज, ज़रूरत, गरीबी और संवेदनहीनता की उन परतों को उजागर करती कविता है, जहाँ हालात इंसान और व्यवस्था दोनों को बेनकाब कर देते हैं।
मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।