एक दिन यूं ही !!
जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.

जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.
माटी से माटी के नाते पर सवाल उठाता मन, पथराई आँखों में छिपी पीड़ा और भीतर सुलगते अहसासों को यह कविता संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है.
“कौन हो तुम?” एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जिसमें प्रेम, विरह, प्रतीक्षा और आत्मिक जुड़ाव की अनुभूतियाँ शब्दों के माध्यम से जीवंत हो उठती हैं।
मनुष्य रूप में प्रभु श्रीराम का अवतार मर्यादा, त्याग और संघर्ष का अद्भुत संदेश देता है। प्रस्तुत कविता उसी दिव्य स्वरूप को भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
प्रेम जब विश्वास मांगता है और रिश्ते परीक्षा लेने लगते हैं, तब सिया के मन में राम से कई अनकहे सवाल जन्म लेते हैं। यह कविता उसी प्रेम, पीड़ा, विरह और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
कुछ भाव ऐसे होते हैं जो शब्दों में नहीं ढल पाते, लेकिन सावन की पहली बारिश उन्हें आवाज़ दे देती है। “सावन को आने दो” ऐसी ही एक भावुक कविता है, जहाँ अनकहे जज़्बात बादलों के साथ उमड़ते हैं, बारिश की हर बूंद प्रेम का संदेश बन जाती है और मन किसी अपने की प्रतीक्षा में भीग उठता है। यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और मानसून की मधुर अनुभूतियों को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।
कभी एक नज़र का दीदार पूरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी बन जाता है, तो कभी वही दीदार उम्रभर का इंतज़ार छोड़ जाता है। यह कविता मोहब्बत, बिछड़न, ख़ामोशी और अनकहे जज़्बातों की ऐसी दास्तान है, जहाँ हर शेर दिल की धड़कनों से निकलकर सीधे रूह तक पहुँचता है। प्रेम के दर्द और दीदार की तड़प को महसूस कराती यह रचना हर प्रेमी के मन की आवाज़ बन जाती है।
एक स्त्री का सबसे सुंदर श्रृंगार क्या है? गीले बाल, काजल की पतली-सी लकीर, होंठों की हल्की मुस्कान या उसकी सादगी? यह कविता बाहरी आभूषणों से आगे बढ़कर उस सहज सौंदर्य को महसूस कराती है, जो बिना किसी बनावट के दिल में उतर जाता है। प्रकृति के बिंबों और गहरे एहसासों से सजी यह रचना सादगी, प्रेम और स्त्री की स्वाभाविक सुंदरता को शब्द देती है।