देश की रक्षा में भी तैनात हैं अनेक बेजुबान जानवर
इस जगत में बेज़ुबान पशु-पक्षी हमारे लिए भोजन (दूध, मांस, अंडे), कृषि (खेत जोतना), परिवहन (बोझ ढोना), वस्त्र (ऊन, चमड़ा), दवा (अनुसंधान) और भावनात्मक सहारे (पालतू जानवर) जैसे अनेक रूपों में अत्यंत उपयोगी हैं। वे न केवल हमारे जीवन के हर पहलू में योगदान देते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लहरों के बीच ठहरा मन
प्रकृति की गोद में बैठकर वह खुद को सुनना चाहती है .सूरज की किरणों, बादलों के आलिंगन, समुद्र की लहरों और पक्षियों की चहचहाहट के बीच। वर्षों के भीतर जमा कोलाहल को पीछे छोड़ते हुए, आत्ममंथन की इस शांत यात्रा में अब एक साधारण-सी चाय की प्याली भी उसे अमृत-सी प्रतीत होने लगी है।
महिदपुर रोड पर घना कोहरा और हल्की फुहारें
महिदपुर रोड पर सर्दियों का पहला असली झटका महसूस हुआ. घना कोहरा और हल्की फुहारों ने शहर को जादुई रूप दिया. मौसम विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की चेतावनी दी.
सफ़ेद में लिपटी लड़की
वह लड़की ज़िंदगी को प्रेम की तरह जीना चाहती थी .शहर की भागदौड़ से दूर, पहाड़ों और जंगलों के बीच, हवा में बाँसुरी की धुन सुनते हुए। उसके हाथ में हमेशा पेन रहता, और हर शब्द उसके दिल की गहरी भावना बन जाता। वह जानती थी कि मौत भी तभी खूबसूरत होगी, जब वह लिखते-लिखते उसे मिले. जैसे जीवन का हर पल उसके प्यार और उसकी स्याही में समा गया हो।
हिंसा और अहिंसा
हिंसा और अहिंसा केवल शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य की सोच और कर्म की दिशा हैं। कोई शरीर को मारता है, कोई मन को—और दोनों ही पीड़ा छोड़ जाते हैं। जो तड़पते को देखकर भी अकड़ जाए, वही सच्ची हिंसा है; और जो बिना कहे दुख हर ले, वही अहिंसा। जीवन की असली परीक्षा वहीं है, जहाँ करुणा सवाल बनकर खड़ी हो जाती है।
ख़त : सैनिकों के नाम
सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।
रिश्तों की रसोई में पकता बुढ़ापा
बुढ़ापा जब शरीर को नहीं, आत्मसम्मान को थका देता है.तब बहू के हाथ का हलवा भी माँ की आँखों में
बीते दिनों की कसक भर देता है।
जुन्नर से गुजरात: 50 तेंदुए जा रहे नए घर
जुन्नर (महाराष्ट्र) से गुजरात तक तेंदुओं का बड़ा “मूवमेंट” होने वाला है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण ने 19 दिसंबर को महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग के 50 जंगली तेंदुओं को गुजरात के ग्रीन प्राणी शास्त्रीय बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी है। इस निर्णय से जुन्नर वन क्षेत्र के मानव-वन्यजीव संघर्ष में राहत मिलने की उम्मीद है।
