बैकअप प्यार :”बेंचिंग”
क्या आपका पार्टनर आपको सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर याद करता है? जानिए रिश्तों में बढ़ रहे ‘बेंचिंग’ ट्रेंड, पुरानी पीढ़ी की टालमटोल से इसकी समानता और खुद को भावनात्मक शोषण से बचाने के आसान तरीके।

क्या आपका पार्टनर आपको सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर याद करता है? जानिए रिश्तों में बढ़ रहे ‘बेंचिंग’ ट्रेंड, पुरानी पीढ़ी की टालमटोल से इसकी समानता और खुद को भावनात्मक शोषण से बचाने के आसान तरीके।
उत्तर दो समय’ सविता मिश्रा का एक भावनात्मक कविता संग्रह है, जिसमें दांपत्य प्रेम, स्त्री जीवन, स्मृतियों और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। यह संग्रह पाठकों को भावनाओं की गहराई में ले जाकर जीवन के अनेक रंगों से परिचित कराता है।
राखी के दिन भाई ने मजाक में कहा कि वह पैसे नहीं देगा और बहन ने गुस्से में उसकी राखी ही तोड़ दी। बचपन की यह छोटी-सी नोकझोंक आज एक ऐसी याद बन चुकी है, जो भाई-बहन के रिश्ते की मासूमियत और अपनापन बयां करती है।
यह कविता एक ऐसी सरल और संवेदनशील लड़की का चित्र खींचती है, जो बहुत कम चाहतों में भी खुश रहना जानती है। उसे बस थोड़ा सा प्यार और देखभाल चाहिए, और बदले में वह अपने स्नेह और समर्पण से जीवन को फूलों सा सजा देती है। वह बोगनवेलिया की तरह है नाज़ुक भी, मगर भीतर से बेहद मजबूत। चाहे परिस्थितियाँ उसे काटें-छांटें, वह बिना शिकायत खामोशी से अपने प्रेम और मासूमियत को बनाए रखती है।
21 मार्च को वसंत सम्पात के चलते दिन और रात बराबर होंगे. उज्जैन की वेधशाला में इस अनोखी खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष देखा जा सकेगा.
सिंहस्थ मेले की तैयारियों में प्रशासन ने पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नए स्थल चिन्हित किए हैं. मक्सी रोड की पार्किंग को धतरावदा शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को घाट तक कम दूरी तय करनी पड़े.
फिल्मी दुनिया में कई सितारे आते हैं, चमकते हैं और फिर वक्त के साथ ओझल हो जाते हैं. लेकिन ऐश्वर्या राय बच्चन उस दुर्लभ श्रेणी में आती हैं, जो सिनेमा से आगे बढ़कर एक स्थायी संस्था बन चुकी हैं. उन्होंने जब फिल्मों की रफ्तार धीमी की, तब भी उनकी कीमत, प्रभाव और पहचान लगातार बढ़ती रही. करीब 900 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ ऐश्वर्या आज केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक साइलेंट पावर ब्रांड हैं.
रेणु परसरामपुरिया, लेखिका, मुंबई आधी रात को फोन की घंटी बजी। आवाज़ से विमल की आंख खुली। गहरी नींद सोए हुए तो एक जमाना बीत गया था। एक घंटी बजते ही आंख खुल गई। — “हेलो… हां… अच्छा…” बस इससे ज्यादा विमल कुछ कह ही नहीं पाए। फटाफट चश्मा लगाया और बगल के कमरे में…
कवि कृष्ण को सबमें और सब कुछ कृष्ण में देखता है। वे ज्ञान भी हैं और विज्ञान भी, वेद भी हैं और उपदेश भी। प्रकृति में बहती सरिता से लेकर सागर की गहराइयों तक, पेड़-पौधों की हरियाली से लेकर धरती की मुस्कान तक हर रूप में कृष्ण विराजते हैं। वे काल भी हैं और भाव भी, प्रेम की ज्वाला भी और विरह की पीड़ा भी। कभी मरहम बनकर सहलाते हैं तो कभी प्रेरणा बनकर दिशा दिखाते हैं। भजन-किर्तन में गूंजते स्वर हों या संसार की माया सब कृष्ण ही हैं, तारणहार भी वही।