लक्ष्य जीवन का
यह कविता जीवन के दर्द, संघर्ष, कर्म और उम्मीद की भावनात्मक यात्रा को शब्द देती है। संवेदनाओं, हौसलों और आत्मिक प्रकाश से भरी यह रचना जीवन-दर्शन की गहरी अनुभूति कराती है।

यह कविता जीवन के दर्द, संघर्ष, कर्म और उम्मीद की भावनात्मक यात्रा को शब्द देती है। संवेदनाओं, हौसलों और आत्मिक प्रकाश से भरी यह रचना जीवन-दर्शन की गहरी अनुभूति कराती है।
घर के पिछले कमरे में रखा वह पुराना संदूक अब एक वस्तु नहीं रहा, वह मानो माँ के जीवन की पूरी कथा समेटे बैठा है। उसमें मायके की यादें हैं, विवाह की रस्मों के निशान हैं, और मातृत्व के पहले क्षणों की सोंधी गंध अब भी बसी है। हर वस्तु, हर दस्तावेज़ किसी बीते समय की गवाही देता है — मनीऑर्डर का पन्ना, साइकिल की रसीद, गाँव का ढहता इतिहास।
माँ के झुर्रियों वाले हाथ जब उसे छूते हैं, तो उनमें फिर वही स्फूर्ति लौट आती है, जैसे वर्षों पीछे लौट गई हों। और मैं, उस संदूक को निहारते हुए, महसूस करती हूँ कि उसमें सिर्फ़ माँ का ही नहीं, मेरा भी जीवन धीरे-धीरे सिमट आया है — तस्वीरों, कपड़ों और दस्तावेज़ों के रूप में। यही तो है “संदूक भर जीवन।”
उज्जैन के श्री महाकाल महालोक में चल रहे महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन भगोरिया, गोंड और बैगा लोकनृत्यों ने शिव भक्ति को जनजातीय उत्सव में बदल दिया। डमरू की गूंज, लोक-संस्कृति और सुरों ने पूरे महालोक को शिवमय कर दिया।
जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस का आयोजन अत्यंत भक्तिमय, भावपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने एकाग्रचित्त होकर कथा श्रवण किया. पूरे पंडाल में भक्ति और आनंद का वातावरण देखने को मिला.
‘मां की खुशी’ एक मार्मिक लघु कहानी है, जो माता-पिता के त्याग, उनके अकेलेपन और समाज के डर के बीच उनकी खुशियों के अधिकार को उजागर करती है। यह कहानी रिश्तों की सच्चाई और बदलती सोच को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।
पुणे की रसायनी बायोलॉजिक्स द्वारा विकसित आयुर्वेद-प्रेरित ‘तिमिरेक्स-आर’ पर आधारित शोध को अमेरिका में आयोजित ARVO-2026 सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नैनो तकनीक आधारित मौखिक उपचार डायबिटिक रेटिनोपैथी के मरीजों में बार-बार आंखों में इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता कम करने में सहायक हो सकता है। अध्ययन में लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को दोबारा इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, यह निष्कर्ष शोध अध्ययन पर आधारित है और व्यापक चिकित्सीय उपयोग के लिए आगे के मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है।
उस दौर में जीवन के उपन्यास पर हस्ताक्षर करना इतना आसान नहीं था, जैसे आज है। मानो जैसे अंगारों पर चलना हो। फिर भी उसे सच बताना पड़ा और मुझे सच छुपाना पड़ा। वह एक संपूर्ण प्रेम-ग्रंथ था और मैं पाँच कोस की बदलती बोली। जीवन के कोरे कागज़ पर उसने मनमर्ज़ियाँ लिखीं और मैंने बंदिशें। कागज़ और स्याही किसी के पास नहीं थे, बस अनाम सी एक उड़ान थी। यक़ीन के साहिल पर वह ठहरा रहा और मैं वक़्त की नज़ाकत में बहती चली गई। उसने चक्रव्यूह की सलाखें तोड़ दीं, जबकि मैं सही और ग़लत के भँवर में उलझती रही। उसके लिए फ़ासले और फ़ैसले कम थे, मगर मेरे लिए वही बहुत भारी थे—कभी वक़्त के और कभी दहलीज़ के।