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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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नीले और सुनहरे रंग की पृष्ठभूमि में बारह राशियों के प्रतीकों से बना ज्योतिषीय चक्र, जो 29 जून 2026 के दैनिक राशिफल और भविष्यफल को दर्शा रहा है।

आज का राशिफल (30 जून 2026)

30 जून 2026 का दिन अधिकांश राशियों के लिए नई संभावनाएं, करियर में प्रगति और आर्थिक लाभ के संकेत लेकर आया है। वहीं कुछ राशियों को निर्णय लेते समय धैर्य और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सकारात्मक सोच और मेहनत आज आपके लिए सफलता के नए द्वार खोल सकती है।

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मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

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मतवाले नयन

आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं होतीं, वे भीतर छुपे भावों की सबसे सशक्त भाषा होती हैं। जब शब्द असहाय हो जाते हैं, तब नयन ही संवाद का कार्य संभालते हैं। कभी शिकायत, कभी शरारत, कभी विद्रोह आँखों की हर गति मन के भीतर चल रहे परिवर्तन को प्रकट कर देती है। वे मनोभावों की कुशल गुप्तचर हैं, जो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाती हैं।

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एक शरारत हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई | मित्र गिरधारी अरोरा को श्रद्धांजलि

एक शरारत हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई

कभी क्रिकेट के मैदान में अपनी स्पिन गेंदों से दोस्तों को छेड़ने वाला, तो कभी अपनी हँसी और शरारतों से हर महफ़िल को जीवंत बना देने वाला गिरधारी अरोरा अब सिर्फ़ यादों में बस गया है। कॉलेज के दिनों की दोस्ती, जनता एक्सप्रेस के सफ़र, महिदपुर रोड की गलियाँ और अनगिनत शरारतें आज भी दिल में ज़िंदा हैं। यह संस्मरण एक ऐसे दोस्त को श्रद्धांजलि है, जिसके जाने से यादों का एक पूरा दौर हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।

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लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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सनम, तुम देना साथ मेरा

यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।

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हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के गौरव को दर्शाता भारतीय दृश्य

हिंदी का सम्मान करें

हिंदी भाषा के सम्मान और राष्ट्रभाषा के स्वर को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती यह कविता भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई गौरव का संदेश देती है।

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लंबे समय बाद मिलते हुए दो लोग, भावनात्मक और रोमांटिक माहौल

यूँ ही तो नहीं

कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी कहानी होती हैं। “यूँ ही तो नहीं” एक ऐसी ही ग़ज़ल है, जो इश्क़ और तक़दीर के अनोखे रिश्ते को उजागर करती है।

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