Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

आँखों की ख़ामोशी

इन आँखों की ख़ामोशी में एक दबी हुई रागिनी है अनकहे शब्दों की, आधी छूटी कहानियों की। चेहरे पर ठहरी शांति और निगाहों में उठते-गिरते समंदर के बीच एक गहरा मंथन छुपा है। ये आँखें जैसे हर सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे बैठी हों, मानो कह रही हों कि उन्होंने बहुत कुछ देखा है… पर कहने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।

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Person noticing hair loss in the shower due to stress-induced Telogen Effluvium, highlighting anxiety and hair health awareness.

तनाव आपके बालों को क्यों कर रहा है कमजोर?

कॉर्टिसोल हार्मोन के बढ़ते स्तर, फॉलिकल सूजन और पोषक तत्वों की कमी से बाल झड़ने लगते हैं। सही आहार और तनाव प्रबंधन से इसे रोका जा सकता है।

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“एक जैकेट, एक बच्चा… और पूरा समाज नंगा”

सर्दियों की परतों में लिपटा एक आदमी, और उसी सड़क पर नंगे पाँव खड़ा एक बच्चा हितेश। कुछ ही सवालों में उसकी पूरी दुनिया खुल जाती है: शराब में डूबे पिता, रजाइयाँ बेचती माँ, स्कूल से कोसों दूर सपने, और नीम के नीचे गुज़ारी हर रात। ठिठुरन उस बच्चे की नहीं, उस आदमी की आत्मा में घुसती है, जो अपनी जैकेट उतारकर भी खुद को नग्न महसूस करता है। हितेश की मासूमियत जैकेट पर डियो छिड़ककर “आपसे बदबू नहीं आएगी” कहना उसकी गरीबी से कहीं ज़्यादा क्रूर है।

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बूँदों की पदचाप…

मैं ध्यानमग्न होकर आज वर्षा की बूँदों की पदचाप सुन रही हूँ। ये बूँदें जैसे कोई देववधू बनकर घूँघट काढ़े आई हों और धरती से मधुर आलिंगन कर उसका संताप हर रही हों। मिट्टी में मिलकर अंकुरित होने लगीं, मानो जीवन की नई कोंपलें फूटने लगी हों। पूरी प्रकृति जैसे किसी रचनात्मक क्रीड़ा में सम्मिलित हो गई हो। इन बूँदों ने तन-मन को धोकर शुद्ध कर दिया, और भीतर की Maya को खोज निकाला। प्रत्येक बूँद अब एक मोती बन गई है, जिसे मन सहेज रहा है, मानो किसी गूढ़ तत्व से मिलने का जाप हो रहा हो।

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सावन सोमवार पर हास्य व्यंग्य लेख, शिव भक्ति और जीवन का संदेश

सावन सोमवार और रिश्तों की तलाश

सावन सोमवार आते ही व्रत, पूजा और मनचाहे वर की कामनाओं का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन क्या सिर्फ उपवास से जिंदगी की खुशियां मिल जाती हैं? एक हल्के-फुल्के अंदाज में यह व्यंग्य बताता है कि खुद को बेहतर बनाना, अच्छे कर्म करना और जीवन का आनंद लेना भी उतना ही जरूरी है।
सावन का मजा लीजिए, भक्ति को सच्चे मन से निभाइए और खुद को इतना काबिल बनाइए कि खुशियां खुद आपके दरवाजे तक आएं।

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कैक्टस

वो कभी तन्हा न लगता है, गमले में भी कितना ख़ुश रहता है… कैक्टस की तरह जो जीवन की हर सख़्ती में भी मुस्कुराता है। न धूप की शिकायत, न छाँव की उम्मीद—बस अपनी मौजूदगी में जीता हुआ एक प्रतीक उम्मीद का।

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कारगिल की पर्वतीय पृष्ठभूमि में तिरंगा थामे दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते भारतीय युवा, जो साहस, एकता, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक हैं।

युवा शक्ति का महासंग्राम

‘युवा शक्ति का महासंग्राम’ वीर रस से परिपूर्ण एक प्रेरक राष्ट्रभक्ति कविता है, जो युवाओं के अदम्य साहस, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त करती है। कविता बताती है कि जब भी युवा अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए हैं, उन्होंने इतिहास रचा है। ओजस्वी भाषा और जोशीले भावों से सजी यह रचना युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध का संचार करती है।

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गोगापुर गौशाला में गायों को चारा खिलाते समाजजन, बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का दृश्य

बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा

महिदपुर रोड के गोगापुर गौशाला में बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज की गरिमामयी उपस्थिति में सेवा, श्रद्धा और धर्म का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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सर्द सुबह में धुंध से घिरा शहर, हल्की धूप, लोग ऊनी कपड़ों में अलाव के पास बैठे हुए

सूरज ओढ़े रजाई

यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.

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गुलाल, गीत और मुस्कान

मातृशक्ति भजन मंडली न्यू शिवाजी नगर के फाग उत्सव 2026 में राधा-कृष्ण झांकी, भजन और रंग-गुलाल की मस्ती ने माहौल को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया।

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