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 समानता का दावा 

हमारे समाज में बराबरी का दावा तो बहुत किया जाता है, मगर हकीकत कुछ और ही है। एक ओर बेटों की चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है, तो दूसरी ओर दहेज के लिए उन्हें जलाया जाता है। बलात्कारियों को बचाने की कोशिश की जाती है, जबकि पीड़िताओं से कठोर सवाल पूछे जाते हैं।

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समाज में फिल्म माध्यम का महत्व सर्वाधिक

समाज के अंतिम छोर तक किसी भी विषय को पहुंचाने का कार्य फिल्म माध्यम के जरिए प्रभावी ढंग से होता है, इसलिए इस माध्यम का महत्व सर्वाधिक है, ऐसा मत प्रसिद्ध अभिनेत्री रेणुका दफ्तरदार ने व्यक्त किया. पी. एम. शाह फाउंडेशन और वर्धमान प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित 14वें स्वास्थ्य फिल्म महोत्सव का समापन रेणुका दफ्तरदार की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ

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महाभारत की सभा में खड़ी द्रौपदी, पांडवों और भीष्म के सामने प्रश्न उठाती हुई

पुरुषार्थ

महाभारत के द्यूत क्रीड़ा प्रसंग के बाद का एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक चित्रण है, जहाँ द्रौपदी पांडवों और भीष्म पितामह के सामने अपने अपमान और न्याय के प्रश्न उठाती हैं। यह रचना न केवल पौराणिक घटना को जीवंत करती है, बल्कि आज के समाज में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। जानिए सच्चे पुरुषार्थ का अर्थ क्या है।

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पावर ऑफ अटॉर्नी फ्रॉड

पुणे में पॉवर ऑफ अटार्नी के नाम पर धोखाधड़ी

“जमीन निवेश के नाम पर भरोसा जीतकर बड़ी रकम ठगने का यह मामला सतर्क रहने की जरूरत को दिखाता है. किसी भी प्रॉपर्टी डील से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच और आधिकारिक पुष्टि बेहद जरूरी है.”

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पहली यादों और भावनाओं को दर्शाता भावुक दृश्य

पहली बात… जो हर पल आती है याद…

जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।

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दो सच्चे दोस्तों के बीच विश्वास और दोस्ती को दर्शाती भावुक तस्वीर

दोस्त

कुछ रिश्ते खून से नहीं, भावनाओं से बनते हैं। एक सच्चा दोस्त वही होता है, जो हमारी खुशियों में मुस्कुराए और दुखों में साथ खड़ा रहे। पढ़िए दोस्ती के इस अनमोल रिश्ते पर भावुक कविता।

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रेगिस्तान में खड़ी एक लड़की के पीछे नागफनी का पौधा, समाज में बेटियों के दर्द का प्रतीकात्मक दृश्य

नागफनी सी बेटियां !

यह कविता बेटियों के प्रति समाज में मौजूद भेदभाव और उपेक्षा की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। नागफनी के प्रतीक के माध्यम से दिखाया गया है कि प्रेम और स्वीकार्यता से वंचित लड़कियां भीतर से कोमल होते हुए भी परिस्थितियों के कारण कठोर बन जाती हैं।

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मशाल थामे साथ दौड़ते लोग, एकता और सामूहिक सफलता का प्रेरक दृश्य।

अहं नहीं, वयं सत्य!

यह कविता ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा को दर्शाती है। अहंकार, प्रतिस्पर्धा और आत्ममुग्धता के बीच सहयोग, मशाल सौंपने और साथ मिलकर मंज़िल पाने का गहरा संदेश देती है।

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बेंगलुरु की सड़कों पर “हैप्पी एयर परेड”

बेंगलुरु। 25 जनवरी को बेंगलुरु की सड़कों पर एक अनोखा और दिल को छू लेने वाला दृश्य देखने को मिलेगा। हैप्पी एयर (Happpy AiR) और बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरे शहर में “हैप्पी एयर परेड” निकाली जा रही है। यह परेड किसी एक रूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के व्यस्ततम सार्वजनिक…

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सपनों की कोई सरहद नहीं…

बिहार के छोटे से शहर से निकलकर देश-विदेश में अपनी साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों से पहचान बनाने वाली रंजीता सिंह फ़लक आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। स्वयंसिद्धा संस्था के माध्यम से वह महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं, वहीं कविकुंभ पत्रिका और अपने चर्चित काव्य संग्रहों के जरिए साहित्य जगत में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर चुकी हैं।

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