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संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ता व्यक्ति, अंधेरे से उजाले की तरफ जाते हुए, उगते सूरज का दृश्य

ठोकरों से ताज तक

यह ग़ज़ल एक साधारण व्यक्ति के भीतर छिपी असाधारण संभावना की कहानी है, जहाँ संघर्ष, आत्मविश्वास और उम्मीद एक साथ चलते हैं। कवि मानता है कि अभी भले ही वह “ख़ाक” है, पर उसी मिट्टी से एक दिन उसका “चाँद” उभरेगा .यही सच्ची जीवन प्रेरणा है। दुनिया भले उसे कमतर आँके, लेकिन उसका विश्वास अडिग है कि मेहनत और सब्र से वह खुद को निखारेगा। हर ठोकर उसे गिराने के बजाय आगे बढ़ने की ताकत देती है, जो अंततः सफलता की ओर ले जाती है।

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ग्रामीण बस स्टैंड पर डरी हुई स्कूल गर्ल, महिला सुरक्षा और शिक्षा पर सवाल

स्वाभिमान का खून

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा क्या सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है? यह लेख बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है।

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डॉ. सविता सिंह को मिला ‘हिंदी साहित्य सेवी सम्मान’

, हिंदी दिवस के अवसर पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना द्वारा आयोजित विशेष समारोह में जमशेदपुर की सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सविता सिंह ‘मीरा’ को “हिंदी साहित्य सेवी सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ द्वारा प्रदान किया गया।

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