
कीर्ति राणा, वरिष्ठ पत्रकार इंदौर (लाइव वॉयर न्यूज के लिए खास रिपोर्ट)
विधानसभा में विपक्ष के विरोध का फैंसी ड्रेस शो जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ थीम पर प्रदर्शन किया। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव से कांग्रेस विधायक सुनील उइके बंदर बनकर आए थे। उनके हाथ में सांकेतिक उस्तरा भी था। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उस बंदर की तरह काम कर रही है, जिसके हाथ में उस्तरा है और वह हर वर्ग के हितों पर उस्तरा चला रही है। चाहे वो किसान हो, बेरोजगार हो या फिर विपक्ष और मीडिया।
प्रदेश अध्यक्ष का नवाचार नहीं, अनुशासन का डंडा है !
भाजपा संगठन के बड़े नेताओं को जिलों के कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ता था कि मंत्री उनकी समस्याओं को नहीं सुनते। जिलों में आते भी हैं तो पार्टी कार्यालय जाने की याद इसलिये नहीं आती कि कुछ गिने-चुने प्रभावी नेता घेरे रहते हैं, काम भी इन्हीं लोगों के होते हैं। आम कार्यकर्ता तो इन मंत्रियों तक पहुंच भी नहीं पाता। ऐसी सारी जमीनी हकीकत समझने के बाद प्रदेश भाजपा संगठन ने अब यह फरमान जारी कर दिया है कि सप्ताह के पांच दिनों में हर दिन दो मंत्री दो घंटे प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे, कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसे प्रचारित तो यह किया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष का यह नवाचार है लेकिन प्रदेश के कार्यकर्ताओं को अब भोपाल आने के लिये यात्रा खर्च तो करना ही होगा।यदि मंत्री जिलों के दौरे में कार्यकर्ताओं से मिलते, समस्याओं का निराकरण करते तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को नवाचार वाले अनुशासन का डंडा चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
🔹किसानों की किसे, कितनी चिंता ?
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा में किसानों के हित में बोला तो सही है लेकिन सरकार कहां उनकी बात पर ध्यान देगी। शेखावत का कहना है कि किसानों से फसल बीमा के सात हजार करोड़ रु लिये और बीमा दिया सात सौ करोड़ का। उनके बदनावर विधानसभा क्षेत्र में ही किसानों को फसल बीमा के रूप में मात्र 51-51 रु बीमा राशि दी है। किसानों को लूट रही है बीमा कंपनी। शेखावत का यह भी कहना था कि 11 साल से सहकारी सोसायटियों के चुनाव तक नहीं कराए गए हैं, गांवों में खाद-बीज की व्यवस्था बिगड़ रही है। सरकार द्वारा सहकारिता की अंत्येष्टी की जा रही है।
🔹 कहें खेत की, सुने खलिहान की
इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 3 से भाजपा विधायक राकेश शुक्ला गोलू ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से पूछा था कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में निर्माणाधीन सीएम राइज स्कूल का निर्माण कार्य कब पूरा होगा, इन स्कूलों में स्वीकृत पदों और अध्ययनरत बच्चों के अनुपात में शिक्षकों की क्या व्यवस्था है, कितनी कमी है या अधिकता है?
विधानसभा में पूछे गए उनके इस प्रश्न का स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने जवाब इस तरह दिया विधानसभा क्षेत्र मेहगांव अंतर्गत संचालित 2 सांदीपनी विद्यालय क्रमश: मेहगांव और अमायन जिला भिण्ड का निर्माण कार्य माह जून 2026 तक पूर्ण होना संभावित है।
बेटे की शादी का निमंत्रण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देने गए विधायक गोलू शुक्ला देश के गृहमंत्री को कैसे बताते कि मप्र के शिक्षा मंत्री का विभाग कितनी लापरवाही से काम कर रहा है।
🔹मुहूर्त देख कर तय करें विधानसभा सत्र
शादी-ब्याह की तरह अब विधानसभा सत्र के लिये भी मुहूर्त निकालना पड़ जाए तो आश्चर्य नहीं। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को इस आशय का सुझाव तो दे ही दिया है। इसका कारण यह कि पांच दिन चले विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर शादियों का सीजन भारी पड़ रहा। आखिरी दिन सदन में ज्यादातर कुर्सियां खाली नजर आई। दोनों दल के कई विधायक आए ही नहीं। जिन विधायकों ने सवाल लगाए थे, उनमें से भी कई शादियों के चलते सदन में मौजूद नहीं रह सके। किसी के परिवार में शादी थी, तो किसी के रिश्तेदार की। इसी कारण विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर को यह सुझाव दिया है कि सत्र तय करने से पहले शादी के मुहूर्त देख लिए जाएं।
🔹राजपाल यादव की सलाह मानेंगे धीरेंद्र शास्त्री ?
सलमान खान और राहुल गांधी की तरह बागेश्वरधाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री का शादी नहीं करना भी चर्चा में रहता है। लोगों ने तो जया किशोरी से शादी की अटकलें लगा रखी हैं। अभिनेता राजपाल यादव अभी जब बागेश्वरधाम और उनके घर गए तो वो भी सलाह देकर आ गए हैं कि अब शादी कर लें मेरे भाई। दरअसल घर पर एक फोटो लगा था जिसमें उनकी मां पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कान पकड़े नजर आ रही हैं। तस्वीर पर लिखा है- अब जल्दी से शादी कर लें मेरे लाल। राजपाल यादव ने तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा- अब शादी कर लें मेरे भाई।
🔹स्वयंभू लोकसभा प्रत्याशी उमा भारती
भाजपा संगठन ने तो घोषणा की नहीं है लेकिन पूर्व सीएम उमा भारती ने खुद को लोकसभा चुनाव के लिये भाजपा प्रत्याशी घोषित कर दिया है । उमा भारती ने ‘एक यात्रा मां के नाम’ निकाली थी, उसी दौरान उन्होंने इस आशय की घोषणा करने के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी मप्र की राजनीति में न तो दिलचस्पी है और न ही वे सीएम बनना चाहती हैं। अपने समर्थकों से उन्होंने यह जरूर कहा है कि कोई धोखे में मत रहना। मैं अभी 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी हूं।
🔹सुधीर कोचर जैसे कितने कलेक्टर हैं ?
दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर जिला अस्पताल और बस स्टैंड स्थित रैन बसेरों का अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए, अव्यवस्थाएं भी देखी। जिला अस्पताल में तो एक मरीज के परिजन को रोते देखा बेहद भावुक हो गए, बहुत आसान था कि संबंधित स्टॉफ, अधीक्षक आदि पर तत्काल कार्रवाई कर देते, लेकिन लोगों ने पहली बार किसी आयएएस अफसर के भीतर नैतिकता और मानवीयता देखी, अक्सर ऐसे मौकों पर अफसर अपने अधीनस्थों पर गुस्सा उतारते हैं लेकिन कोचर ने बिना लाग लपेट के इस सब के लिए खुद को भी जिम्मेदार माना कि मातहत तो बड़े अधिकारी से ही सीखते-समझते हैं। यहां यदि अब तक अव्यवस्था दूर नहीं हुई तो इसके लिये मैं दोषी हूं।
🔹घर के संकट में उलझे !
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत वहां चल रहे राजनीतिक सरगर्मी पर तो नजर रख रहे हैं लेकिन परिवार में चल रही उठापटक पर क्या करें।उनके पोते की पत्नी दिव्या ने दादी सास, पति, देवर और ननद पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट, लगातार मानसिक उत्पीड़न, जान से मारने की धमकी और घर की छत से धक्का देकर चोट पहुंचाने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं।
रतलाम पुलिस को दिए लगभग चार पन्नों के आवेदन में शिकायतकर्ता ने घरेलू हिंसा के घटना क्रम को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि उसका विवाह पारिवारिक रीति-रिवाज और सामाजिक स्तर के अनुरुप धूमधाम से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि परिवार के सदस्यों ने उस पर पचास लाख रुपए लाने का दबाव बनाया। रकम न मिलने पर लगातार झगड़े, मारपीट, अपमानजनक व्यवहार तथा चरित्र-हनन जैसी हरकतें कीं।ऐसा नहीं कि दहेज प्रताड़ना से जुड़ी यह अनोखी घटना है, मामला राज्यपाल के परिवार से जुड़ा नहीं होता तो प्रदेश में चर्चा भी नहीं होती।
🔹बेटी की प्रेरणा से पिता करने लगे सेवा कार्य
इंसान को जीवन में सबसे ज्यादा जरूरत जिस चीज की है वो है दो वक्त की रोटी । जीवन जीने के लिए रोज़ाना दो बार का भोजन जरूरी है लेकिन कई लोगों को ये भी नसीब नहीं है। जरूरतमंदों और बेघर लोगों को भूखा न सोना पड़े, इसी सोच के साथ गाडरवारा निवासी विशाल सिंह ठाकुर ने 2015 में 6 रोटी से सेवा कार्य की शुरुआत की थी। बेटी अलंकार की प्रेरणा से शुरू हुआ यह छोटा प्रयास आज मानवता की बड़ी मिसाल बन गया है। गाडरवारा रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 250 से 300 लोग और कई बार 500 से भी अधिक जरूरतमंद समानपूर्वक भोजन प्राप्त कर रहे हैं। विशाल ठाकुर ने इस दिशा में कदम बढ़ाया और धीरे-धीरे शहर के लोग भी सेवा अभियान से जुड़ते चले गए। आज दल के सदस्य शहर और स्टेशन क्षेत्र में नियमित रूप से भोजन वितरण कर रहे हैं।
🔹गौ माता मजे में, मित्र गौ सेवक मुसीबत में !
सरकार को जितनी चिंता गाय और गौशाला की है उतनी मित्र गौ सेवकों की नहीं। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के सर्वे के लिए रतलाम में मित्र गौ सेवकों को काम पर लगाया गया है। प्रदेश में पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं की नस्ल सुधार के लिए चलाए जा रहे इस सर्वे के लिए इन्हें गांव-गांव भटकना पड़ता है, जान कर ताज्जुब होगा कि पचास रु रोज का पेट्रोल फूंकने और दिन में चार-पांच घंटे भटकने के बदले में इन्हें मानदेय मिल रहा है मात्र पांच रुपये प्रति परिवार । ऊंट के मुंह में जीरा समान मानदेय को लेकर मित्र गौसेवकों के संगठन ने रतलाम सहित सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन भी दिया है।
मित्र गौसेवकों का कहना है उन्हें चुनिंदा पशुपालकों के घर पर जाकर सर्वे करना है और इस अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी भी देना है। आदिवासी अंचल के दूरस्थ गांव में कहीं 6 परिवारों का सर्वे करना है तो किसी गांव में केवल एक परिवार का. जिसके लिए उन्हें अधिकतम 30 रुपये और न्यूनतम 5 रुपये ही मिल पाएंगे ।
🔹जनसुनवाई में अनसुनी के दो साल
हर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई में लोगों के आवेदन लेने वाले अधिकारी तो बदल जाते हैं लेकिन उन आवेदकों की समस्या वहीं के वहीं रह जाती है। रतलाम कलेक्ट्रेट में चल रही जनसुनवाई में 2 किसान अपनी अलग-अलग समस्या लेकर पहुंचे थे, समस्या दोनों की अलग-अलग है लेकिन पीड़ा एक समान हैं। करीब 2 साल से लगातार जनसुनवाई और शासकीय दफ्तर में आ रहे इन किसानों को समस्या का समाधान नहीं मिला है. नगरा गांव के किसान प्यार सिंह और खेतलपुर गांव के किसान रामचंद्र ने पूर्व कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के दौर से जनसुनवाई में आ रहे हैं।
किसान प्यार सिंह ने खेत में दवा छिड़कने के लिए एक कंपनी की दवाई ली थी, जिसका बिल भी उनके पास है। उस दवाई को छिड़कने के बाद उनकी फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने कंपनी के साथ ही जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को इसकी शिकायत की । तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर कृषि अधिकारियों ने फसल एवं खेत की जांच की और कीटनाशक कंपनी की दवाई से ही फसल खराब होना भी पाया। इस खराब फसल का सैंपल लेकर उसकी लैब टेस्ट रिपोर्ट लेना कृषि विभाग के अधिकारी भूल गए। जब कृषक ने मुआवजा मांगा तो उन्होंने कहा कि आप उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ दावा करें। किसान ने कंपनी के खिलाफ दावा भी किया लेकिन उपभोक्ता फोरम ने कृषि विभाग द्वारा की गई जांच की लैब रिपोर्ट मांग ली। इसके बाद से ही दोनों किसान कृषि विभाग और जनसुनवाई के चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं।
🔹सिंधिया का एक्शन प्लान
केन्द्रीय मंत्री-गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया 4 दिवसीय दौरे पर गुना पहुंचे थे। यहां वे लक्ष्मीगंज में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने सिंध नदी से गुना शहर के लिए जलप्रदाय योजना के लिए 48.74 करोड़ रुपये का भूमिपूजन किया और कई भवनों का लोकार्पण किया।सिंधिया ने जिले की जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सिंध नदी जल प्रदाय योजना की 48.74 करोड़ रुपए की अमृत 2.0 परियोजना का भूमिपूजन किया। इस परियोजना से वर्ष 2050 तक गुना शहर को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया है। सिंधिया ने दावा किया है कि यह योजना आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित जल की गारंटी प्रदान करेगी।
🔹केंद्र से अब कौन पंगा ले…!
मध्य प्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीद करने वाला नागरिक आपूर्ति निगम गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहा है। किसानों का गेहूं और धान को समर्थन मूल्य पर खरीदना राज्य सरकार की जेब पर अब भारी पड़ रहा है। केन्द्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं और धान पर दी जाने वाली राशि को घटा दिया है। निगम पर कुल देनदारी बढ़कर 62 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है, जबकि प्रतिदिन करीब 14 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ रहा है। विधानसभा में खुद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने लिखित में दी।केंद्र में जब कांग्रेस सरकार थी तब पूर्व सीएम शिवराज सिंह ऐसे ही मुद्दे पर भोपाल में अनशन पर बैठ गए थे।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले कई वर्षों में समर्थन मूल्य पर खरीद और अन्य योजनाओं के संचालन के लिए निगम को भारी-भरकम ऋण लेना पड़ा। मार्च 2021 में निगम पर 37,381 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो मार्च 2022 में बढ़कर 44,612 करोड़ रुपये हो गया।
इसके बाद मार्च 2023 में यह आंकड़ा 39,442 करोड़, मार्च 2024 में 35,998 करोड़ और मार्च 2005 में 47,652 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं 13 नवंबर 2025 तक नागरिक आपूर्ति निगम पर कुल 62,944 करोड़ रुपये का बकाया हो चुका है। केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को पिछले 5 सालों में 70 हजार करोड़ रुपए की राशि ही मिली है, जबकि राज्य सरकार को गेहूं और धान का भुगतान करने के लिए 1 लाख 59 हजार 259 करोड़ रुपए चुकाने पड़े. केन्द्र से कम राशि मिलने की भरपाई करने के लिए राज्य सरकार को बैंकों से कर्ज लेना पड़ा है।
🔹सलामत रहे दोस्ताना हमारा …!
महापौर और निगमायुक्त में कुछ महीने पहले तक छत्तीस के आंकड़े जैसे हालात थे। महापौर ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ते थे जिसमें निगमायुक्त की टीम निशाने पर नहीं रहती हो किंतु अब बर्फ पिघल गई है। महापौर और निगमायुक्त साथ में दौरे कर रहे हैं। यही नहीं कई बार तो दोनों यह उदारता भी दिखाने लगे हैं कि एक-दूसरे की सुविधा मुताबिक बैठक और उसके एजेंडे पर चर्चा कर लेते है, बैठक में भी दोनों की बॉडी लैंग्वेज ऐसी रहती है कि निगम अमला समझ जाता है कि अब काम में ढिलाई की तो दोनों निपटा सकते हैं।
