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शाकुन्तलम सम्मान 2026 के लिए चयनित जयपुर की लेखिका संतोषी

ईशमधु तलवार स्मृति शाकुन्तलम सम्मान 2026 जयपुर की लेखिका संतोषी को

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र संस्थान की ओर से स्थापित ईशमधु तलवार स्मृति शाकुन्तलम सम्मान 2026 के लिए लेखिका संतोषी का चयन किया गया है। उन्हें उनकी पुस्तक ‘रोही की रोजड़ी’ के लिए 21,000 रुपये की सम्मान राशि, शॉल, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाएगा। सम्मान समारोह 11 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित होगा।

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मैं कलम हूँ

“मैं कलम हूँ” एक प्रेरणादायक कविता है जो कलम की शक्ति, सच्चाई और अभिव्यक्ति के महत्व को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि शब्दों में दुनिया बदलने की ताकत होती है।

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पुणे में जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ की ठगी, रिटायर्ड एसीपी समेत 5 पर केस

जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ की ठगी

पुणे में जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें रिटायर्ड एसीपी सहित 5 लोगों पर केस दर्ज किया गया है. आरोपियों ने मुनाफे का झांसा देकर पैसे लिए और शिकायतकर्ता को धमकाया.

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सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति और पहचान बनाती भारतीय महिला।

सोशल मीडिया पर वह

चारदीवारी में गुमसुम रहने वाली स्त्री जब सोशल मीडिया पर अपने शब्दों के सहारे बोलने लगती है, तो उसकी भावनाओं, प्रतिभा और अस्तित्व को नई पहचान मिलती है। छाया सीमा खंडागळे की यह कविता डिजिटल दुनिया में नारी की अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को रेखांकित करती है।

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निशिगंधा के फूल, मिट्टी के जलते दीये और चाँदनी रात में नदी किनारे ध्यानमग्न स्त्री

दिल को छूती मौन की गूँज…

“निशिगंधा की महक से जग उठा संसार, आंखों में बह रही गंगा और यमुना की धाराएँ। मिट्टी के दीपों की रौशनी में प्रार्थना और शांति पंचतत्व में विलीन हो रही हैं, और एक गीत हर दिल को छूते हुए गूँज रहा है।”

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तिरंगा – हमारा मान

भारत में “तिरंगा” शब्द भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को संदर्भित करता है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना ध्वज होता है, जो उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में और उसके बाद भारत गणराज्य के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कार्य करता रहा।

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प्रतिभावान स्त्री की मनोव्यथा और स्त्री-विरोधी मानसिकता

प्रतिभा से डरता समाज, चरित्र पर उठाता सवाल !

एक स्त्री जब मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष से अपनी पहचान बनाती है, तो उसकी उपलब्धियों के बजाय उसके चरित्र पर सवाल क्यों उठते हैं? यह लेख इसी सामाजिक मानसिकता और प्रतिभावान स्त्री की मनोव्यथा को सामने रखता है।

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बस अब और नहीं 

सान्वी ने सुबह की सारी व्यस्तताओं से निवृत्त होकर बालकनी में बैठकर बारिश की बूंदों को निहारना शुरू किया। उसी समय उसके भीतर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और आंतरिक तूफ़ान ने नया रूप ले लिया। अतीत के घाव, निराशा और खुद से होने वाली आत्मग्लानि ने उसे झकझोर दिया। और तभी उसने ठान लिया. बस, अब और नहीं!”उसने अपने अनवरत युद्ध को विराम देने का साहस जुटाया, और अपने अंतर्मन पर पूर्ण नियंत्रण पाकर आत्मा की जीत का अनुभव किया।

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नलखेड़ा का जागृत धाम

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कौशल बंसल ने मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा के जीर्णोद्धार और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी आध्यात्मिक साधना, अनुभव और चमत्कारी घटनाओं से यह धाम आज एक जागृत शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है।

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दोस्ती कैसे करें

दोस्ती का साइंस: नए दोस्त बनाने के 5 आसान तरीके

मनोविज्ञान के अनुसार दोस्ती बनाना कोई कठिन कला नहीं, बल्कि एक समझी जा सकने वाली प्रक्रिया है. बार-बार मिलना, खुलकर बातचीत करना, पहल करना और रिश्तों को समय देना ये छोटे लेकिन असरदार कदम किसी भी व्यक्ति को मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली दोस्ती बनाने में मदद कर सकते हैं.

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