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सेंट्रल रेलवे के जीएम ने किया होस्टल जयगढ़ का उद्घाटन

मध्य रेल्वे के महाव्यवस्थापक श्री धर्मवीर मीना ने मंगलवार को भायखळा स्थित सिग्नल और लिकॉम प्रशिक्षण संस्था का निरीक्षण किया और प्रशिक्षणार्थियों के लिए नवनिर्मित जयगढ़ वसतिगृह (छात्रावास) का उद्घाटन किया।

जयगढ़ छात्रावास में 36 सुसज्ज कक्ष हैं, जिनमें 144 प्रशिक्षणार्थियों के निवास की सुविधा है। इस भवन में व्यायामशाला, मनोरंजन कक्ष, भोजन कक्ष और वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।

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होशियार मां

सरला को यक़ीन था कि उसकी बहू उसकी सहेली बनेगी। पर शादी के बाद कहानी कुछ और ही निकली। रिश्ते की शुरुआत से ही अमीषा के नख़रे और लालच से अमित टूटने लगा। जब उसने पैसों और ज़मीन की माँग की तो सरला को समझ आ गया — बात सिर्फ़ ईगो या गलतफ़हमी की नहीं, लोभ की थी। बेटे को बचाने के लिए उसने शांति से, लेकिन चतुराई से उस सच को रिकॉर्ड कर लिया — जिस पर अमीषा को हमेशा भरोसा था कि कोई पकड़ नहीं पाएगा।कोर्ट में सच्चाई का वीडियो जैसे ही सामने आया सबकी स्थिति पलट गई।

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कितनी अमायरा!

अखबारों की सुर्खियाँ कभी–कभार दहला देती हैं.जान देती बच्चियाँ, दबा दी जाती चीखें,और घोंघे सी रफ्तार से सरकतीं फाइलें। कुछ अमायरा साहस करती हैं, कुछ सहती हैं, कुछ ज़हर के घूंट पी जाती हैं…और कुछ अंतिम मुक्ति चुन लेती हैं।
बाल-दिवस पर याद आती है अमायरा. जिसकी मासूमियत दुनिया की क्रूरता से हार गई।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए पुणेकरों ने चलायी साइकिल

पुणे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर राज्यसभा सांसद प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी की पहल से आयोजित ‘पुणे ऑन पेडल्स’ साइकिल रैली और वॉकथॉन में हजारों पुणेकरों ने भाग लेकर शारीरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर 75 जरूरतमंद बच्चों को साइकिल वितरण भी किया गया।

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सीता चाहिए, तो राम भी बनो

यह कविता समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, एसिड अटैक, महिलाओं के प्रति हिंसा और दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रश्न उठाती है। साथ ही यह पुरुषों को राम और कृष्ण जैसे आदर्शों का अनुसरण कर नारी सम्मान की रक्षा करने का संदेश देती है।

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उस शाम…

उस शाम का मौन बहुत कुछ कह गया। आपके कहने का इंतज़ार नहीं था मुझे, क्योंकि आपकी नज़रें और आपकी ख़ामोशी ही मेरे दिल तक उतर आई थीं। वह अहसास किसी अनदेखी धारा की तरह मेरे हृदय को छूता चला गया। आसमान पर टिमटिमाते तारे हमारे साक्षी बने और हरसिंगार की महक ने आपके मन की अनकही बात मुझ तक पहुँचा दी। हम आमने-सामने थे, और ऐसा लगा जैसे हमारे दिलों के द्वार सदियों से एक-दूसरे की प्रतीक्षा कर रहे हों। दूर तक फैली चाँदनी ने हमें घेर लिया और हरसिंगार की माला ने हमारी आत्माओं को एक सूत्र में बाँध दिया। उस पल न समय का कोई बंधन था, न दूरी की कोई दीवार—बस आप थे, मैं थी और हमारा गहरा, मौन प्रेम।

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 युगान्तर

उस दौर में जीवन के उपन्यास पर हस्ताक्षर करना इतना आसान नहीं था, जैसे आज है। मानो जैसे अंगारों पर चलना हो। फिर भी उसे सच बताना पड़ा और मुझे सच छुपाना पड़ा। वह एक संपूर्ण प्रेम-ग्रंथ था और मैं पाँच कोस की बदलती बोली। जीवन के कोरे कागज़ पर उसने मनमर्ज़ियाँ लिखीं और मैंने बंदिशें। कागज़ और स्याही किसी के पास नहीं थे, बस अनाम सी एक उड़ान थी। यक़ीन के साहिल पर वह ठहरा रहा और मैं वक़्त की नज़ाकत में बहती चली गई। उसने चक्रव्यूह की सलाखें तोड़ दीं, जबकि मैं सही और ग़लत के भँवर में उलझती रही। उसके लिए फ़ासले और फ़ैसले कम थे, मगर मेरे लिए वही बहुत भारी थे—कभी वक़्त के और कभी दहलीज़ के।

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कारगिल की पर्वतीय पृष्ठभूमि में तिरंगा थामे दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते भारतीय युवा, जो साहस, एकता, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक हैं।

युवा शक्ति का महासंग्राम

‘युवा शक्ति का महासंग्राम’ वीर रस से परिपूर्ण एक प्रेरक राष्ट्रभक्ति कविता है, जो युवाओं के अदम्य साहस, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त करती है। कविता बताती है कि जब भी युवा अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए हैं, उन्होंने इतिहास रचा है। ओजस्वी भाषा और जोशीले भावों से सजी यह रचना युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध का संचार करती है।

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दिल टूटने के बाद आत्मनिर्भर बनती महिला की भावनात्मक स्थिति

अभिलाषा

नहीं थी हीरे मोती की अभिलाषा, बस साथ तुम्हारा चाहती थी… अब ना है कोई अभिलाषा, ना ही तुम्हारे साथ की आशा अब खुद के लिए जियूं, बस यही है मेरी अभिलाषा।”

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पुरानी गलियों में खड़ा एक व्यक्ति बचपन की यादों में खोया हुआ, भावनात्मक दृश्य

वो गलियां

“वो गलियां” कविता बचपन की यादों, पुरानी गलियों और बीते समय की भावनात्मक यात्रा है। यह रचना बताती है कि अतीत हमें संवारता है, लेकिन भविष्य का निर्माण केवल आज के संघर्ष और प्रयासों से होता है। यादों और वर्तमान के बीच संतुलन का सुंदर संदेश देती कविता।

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