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मुंबई: जहां हर धक्का सिखाता है जीना

मुंबई का आकर्षण दूर से देखने पर समंदर की लहरों, हैरिटेज इमारतों और तेज़ रफ्तार भागती ज़िंदगियों में नज़र आता है। लेकिन असली मुंबई की पहचान लोकल ट्रेनों की धक्का-मुक्की, जद्दोजहद और संघर्ष में छिपी है। यहाँ हर धक्का इंसान को जीना सिखाता है और हर मुश्किल उसे मज़बूत बनाती है।”

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यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे बाल कृष्ण का भावपूर्ण और दिव्य दृश्य।

यशोदा-दामोदर

यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।

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वो कुछ लोग…

ज़िंदगी भी एक ट्रेन की तरह है — जो धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ते हुए हमें आगे ले जाती है। हर पड़ाव पर कुछ न कुछ पीछे छूट जाता है — कोई शहर, कोई गलियां, कुछ अपने लोग। लेकिन जो सच में हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके होते हैं, वे कभी पूरी तरह नहीं छूटते। वे ठहरे रहते हैं — हमारी यादों में, हमारी भावनाओं में, और उस अगली मुलाक़ात की उम्मीद में, जैसे स्टेशन पर खड़े वे लोग जो ट्रेन गुज़र जाने के बाद भी कुछ देर तक हाथ हिलाते रहते हैं… यादें, उदासी और इंतज़ार लिए।

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कुछ नजारे ऐसे…

कुछ नज़ारे ऐसे होते हैं जो पूरी ज़िंदगी को समेटे रहते हैं। वे लौटकर फिर कभी नहीं आते, लेकिन जाते हुए भी दिखाई नहीं देते। कभी वे प्रेम-रस से भरे बादलों की तरह मन के भँवर को पागल बना देते हैं, तो कभी यादों के आकाश में उड़ते पंछियों की तरह हमें बीते दिन और रातें लौटा लाने को मजबूर करते हैं।

कुछ नज़ारे आँखों के काजल जैसे होते हैं, जो मन में फूलों की डोली सजा देते हैं और अपनी रंग-बिरंगी खुशबू से जीवन भर को महका जाते हैं। जब वे याद आते हैं, तो चेहरे पर एक मुस्कान ले आते हैं और यह अहसास कराते हैं कि जीवन में कोई प्यारा साथ है, जिसके साथ ज़िंदगी जीने लायक बनती है।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में झील किनारे एक महिला के हाथ पर फ्रेंडशिप बैंड बाँधती हुई एक युवा लड़की, पृष्ठभूमि में शांत पार्क और भावनात्मक माहौल।

फ्रेंडशिप डे

सुबह की सैर, झील की मछलियाँ, एक युवा जोड़ा और फ्रेंडशिप डे का एक छोटा-सा प्रसंग… यह कहानी दोस्ती और प्रेम के बीच सम्मान के महत्व को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। अंत में एक अनजान लड़की द्वारा बाँधा गया फ्रेंडशिप बैंड पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ जाता है।

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ज्ञान का दीप जलाते हुए गुरुदेव, चरणों में नतमस्तक शिष्य, गुरु वंदना पर आधारित भक्ति भजन।

गुरु ज्ञान का दीप

“गुरुदेव तुम्हारा अभिनंदन” गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता से भरा एक भावपूर्ण हिंदी भजन है। इसमें गुरु को ज्ञान का दीप, जीवन का आधार और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला मार्गदर्शक बताया गया है। यह भजन गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का सुंदर वर्णन करता है और गुरु पूर्णिमा, सत्संग तथा आध्यात्मिक आयोजनों के लिए उपयुक्त है।

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मैं लिखने बैठी हूँ – भावनाओं और रचनात्मकता पर आधारित हिंदी कविता

मैं लिखने बैठी हूँ

“मैं लिखने बैठी हूँ” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें कवयित्री अपने मन में उमड़ते विचारों, जीवन के अनुभवों, प्रेम, प्रकृति और स्मृतियों को शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता आत्मा की आवाज़ और संवेदनाओं की गहराई को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।

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गहनों की बेड़ियों में बंधी हुई एक महिला, जो समाज में नारी की स्थिति और संघर्ष को दर्शाती है

अधूरी पहचान

“नारी का अस्तित्व बस इतना सा…” कविता समाज में नारी की वास्तविक स्थिति और उसके संघर्षों को उजागर करती है। यह रचना दर्शाती है कि कैसे नारी को कभी देवी तो कभी दासी बनाकर उसके अधिकारों को सीमित किया गया। यह कविता नारी सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का गहरा संदेश देती है।

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वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

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