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आदत जो बदलनी नहीं चाहिए

मौसमी चंद्रा, प्रसिद्ध लेखिका, पटना

दिन बहुत लंबा था।
बच्चों का स्कूल, ऑफिस की मीटिंग्स, और बीच में एक टूटा हुआ जूड़ा!
जिसे बाँधने तक की फुर्सत नहीं मिली।

रात को हमेशा की तरह उसका मैसेज!
मेरे एक दो रिप्लाई के बाद ही उसने लिखा…
“शॉर्ट रिप्लाइज! थकी लग रही हो आज। कुछ हुआ?”

मैंने सोचा, कह दूँ कि कुछ नहीं, पर सच कहने का मन किया!
“हाँ इनदिनों ज़िंदगी जरा भारी हो रही, कभी भागती है तो कभी सुस्त पड़ जाती है।”

वो थोड़ी देर चुप रहा फिर लिखा…
“चाय बनाओ, खिड़की खोलो, और बस बैठ जाओ। अपना मनपसंद काम करो न, कविताएं लिखो और हां ये सोचकर लिखना मानो मैं भी वहीं बैठा हूं।”

मैं मुस्कुरा दी।
“क्यों भला! कविताएं लिखने के लिए तुम्हें सोचना जरूरी है क्या!”

“हां न! बहुत जरूरी है। प्रेम कविताएं मुझे बिठाए बिना कैसे लिख पाओगी तुम!”

“अच्छा! कॉन्फिडेंस लेवल हाई है जनाब का!”
मैंने पूछा।

“वो तो है! कुछ बातें तुम्हारे बिना बोले भी समझता हूं!”

अजीब है ये आदमी,
ना “आई लव यू” बोलता है, ना कोई ड्रामा,
फिर भी जाने कैसे पूरी थकान उतार देता है। बातों का जादूगर है या दर्द – ए – दिल का कोई वैद्य!

मैंने चाय बनाई और खिड़की के पास बैठ गई।
सामने पीपल का पेड़ हवा में हिल रहा था…
जैसे कह रहा हो…”सब ठीक हो जाएगा।”

उसने फिर मैसेज किया।
“जानती हो, उम्र के इस पड़ाव पर प्यार शब्द नहीं माँगता,बस किसी का थोड़ा-सा होना ही काफी लगता है।”

मैंने जवाब दिया-
“और वो थोड़ा-सा होना भी जब रोज़ हो जाए न,
तो लगता है मानो जिंदगी वहीं पर दो पल इत्मीनान से बैठती है।”

थोड़ी देर चुप्पी रही।
फिर उसने लिखा —
“मुझे लगता है तुम्हारे घर की हवा में अब शायद मेरी आदत मिल गई है।”

मैंने खिड़की से बाहर देखा।
रात उतर रही थी…
और वाकई,
हवा में थोड़ी शांति थी… तुम-सी।

ऐ जिंदगी तुम्हें अपनी जैसी भी चाल रखनी है रखो,कभी सुस्त कभी बहुत तेज...लेकिन हो सके तो इस मेरे पसंदीदा शख़्स की ये रोज मेसेजेज करने की आदत बरक़रार रखना, मैं चौबीस घंटों में कुछ पल सुकून के चाहती हूं। देना मुझे प्लीज!

13 thoughts on “आदत जो बदलनी नहीं चाहिए

  1. वाह! बस किसी का थोड़ा सा होना ही काफी लगता है। अति सुन्दर।

  2. बस किसी का होना ही एक संबल होता है,बेहतरीन सृजन

  3. भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति। मौसमी जी सुंदर कृति।

  4. जब थकान हो तो कोई बात करने और सुनने वाला हो तो हर सफ़र सुंदर हो जाता है ।
    बहुत सादगीपूर्ण सच्चाई लिखी ,
    शुभकामनाएँ

    1. हम्ममम! लफ्जों में जब बांधना, तब ऐसे ही हमेशा बांधना। ऐसे बंधन सुकून देते हैं। लफ़्ज़ों में भी कितने तारे बंधे होते हैं न! बस, जुड़ जाते है। खटाक से

  5. हम्ममम! लफ्जों में जब बांधना, तब ऐसे ही हमेशा बांधना। ऐसे बंधन सुकून देते हैं। लफ़्ज़ों में भी कितने तारे बंधे होते हैं न! बस, जुड़ जाते है। खटाक से

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