सुनो साहिब…
“सुनो साहिब” एक कोमल और गहरी भावनाओं से भरी कविता है, जो प्रेम के उस एहसास को व्यक्त करती है जहाँ दो दिल धीरे-धीरे एक-दूसरे में समाने लगते हैं। यह रचना बताती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर सांस, हर धड़कन और हर ख्वाब में बस जाता है। जब मोहब्बत अपनी गहराई पर पहुँचती है, तो इंसान खुद को भी अपने प्रिय के भीतर खोजने लगता है। यह कविता समर्पण, अपनापन और आत्मीय जुड़ाव की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।
