हलफनामा

पुरुष ने बड़ी कुशलता से मिट्टी और स्त्री में बीज बोने के अधिकार अपने अधीन कर लिए। उसने सब कुछ नियंत्रित किया, जिसमें स्त्री के मस्तिष्क का एक छोटा सा कोना भी शामिल था। दिखावे की रंगीन दुनिया में उसने बड़ी सफाई से अपना भार स्त्री के कंधे पर डाल दिया।

अब, जब स्त्रियों ने पुरुष सत्ता-कमान को कुशलता से संभाल लिया है, पुरुष तुरंत नए आदर्श स्थापित करने में जुट गया। अपराध भाव और जकड़न की स्थिति में विद्रोह की लौ को स्त्रियों ने सहजता से दबा दिया। यह धीरे-धीरे एक नए हलफनामे में तब्दील हो रहा है, जो बदलाव और संतुलन की दिशा में संकेत देता है।

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अजब-गजब के रिश्ते

मैंने कई रिश्तों से गुज़रते हुए बहुत कुछ देखा है। मैंने उन लोगों को देखा जो दिल और जान से मरने वाले थे, पर उनके ही सीने में खंजर उतरते थे। जो लोग महफ़िलों में सीना चौड़ा करके सामने आते थे, उन्हें पीठ में वार करते देखा है। रात भर चादर की सिलवटों को और सुबह उसी चादर को सीधा होते भी देखा है। मैंने उन लोगों को भी देखा जो ताउम्र जख्म देते रहे, और फिर उनके कंधों पर सिर रखकर रोते थे। जिंदगी में बहारों का मौसम लेकर आने वाले लोगों को अक्सर ऐसे लोगों को विरानियों में बदलते हुए देखा है।

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प्रेम का वादा, पीड़ा का सच

नारी का हृदय प्रेम में जितना कोमल होता है, पीड़ा में उतना ही कठोर अनुभवों से गुजरता है। प्रेम से पीड़ा तक का यह सफ़र उसकी संवेदनाओं को भीतर तक झकझोर देता है। धोखा, अपमान और परित्याग उसके आत्म-सम्मान को धज्जी-धज्जी कर देते हैं, कभी-कभी तो उसे जीवन-लीला समाप्त करने की कगार पर पहुँचा देते हैं।

फिर भी वही नारी आँसुओं में भी शक्ति ढूँढ़ लेती है। टूटकर भी वह बिखरती नहीं, बल्कि खुद को गढ़ लेती है—अपनी प्रतिमा, जिसमें प्राण फूँकने के लिए किसी और की आवश्यकता नहीं। यही उसका आत्मविश्वास है, यही उसकी सच्ची शक्ति।

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नई शुरुआत

यह कविता हमें याद दिलाती है कि पराजय को भूलकर स्वयं पर विश्वास करना और पुनः शुरुआत करना आवश्यक है। आने वाला कल बेहतर होगा, और प्रसन्नता, धैर्य, हौसला और सतत प्रयास हमें निराशा से आगे बढ़ने में मदद करेंगे। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके, अच्छे कर्म करते हुए हम सफलता और खुशियों की राह प्रशस्त कर सकते हैं।

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लफ़्ज़ों के तीर

दायरे सिमटते रहे और दूरियाँ बढ़ती रहीं।
हर रोज़ खुद को तराशते गए, फिर भी कमियाँ निकलती रहीं। उसके बदले हुए लहजे तीर बनकर लगे,और हम हर गिरावट के बाद हुनर से फिर सँभलते रहे।

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खंडाला घाट में ब्रेक फेल ट्रेलर ने मचाई तबाही

मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर शनिवार दोपहर खंडाला घाट में एक भीषण हादसा हो गया। खोपोली एग्जिट से खालापुर टोल नाके तक के तीव्र ढलान पर एक ट्रेलर के ब्रेक फेल हो गए, जिससे वह लगभग चार किलोमीटर तक बेकाबू होकर 24 वाहनों से एक के बाद एक टकरा गया। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 21 लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। हादसे के कारण मुंबई की ओर जाने वाला यातायात दो घंटे तक पूरी तरह ठप रहा, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

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“इश्क़, एल्कोहल और ऑक्सीटोसिन

नब्बे का दशक इश्क़, संगीत और साइंस की जुगलबंदी का दौर था — जब रिकी मार्टिन दिलों पर राज कर रहे थे और वैज्ञानिक प्यार का फार्मूला गढ़ रहे थे। यह लेख उस मोहब्बती समय की एक संवेदनशील, हास्य-विनोद और आत्ममंथन से भरी झलक है।

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Realistic scene of a tired young woman sitting alone in a dim, cluttered room during rain, with wet clothes hanging, cats nearby, and a phone on the floor showing missed calls, expressing guilt and emotional heaviness, with a blurred train visible outside the window.

छूटी हुई फोन कॉल्स के संकट …

यह रचना एक छूटी हुई कॉल के बहाने मनुष्य के भीतर छिपे अपराधबोध, थकान और रिश्तों की अनकही दूरियों को उजागर करती है। रोज़मर्रा की भागदौड़, शारीरिक पीड़ा और मानसिक उलझनों के बीच छूटे छोटे-छोटे क्षण किस तरह गहरे पछतावे में बदल जाते हैं, यही इसका केंद्र है। एक साधारण-सी छूटी कॉल यहाँ जीवन के बड़े संकट, टूटते संबंधों और भीतर की असुरक्षा का प्रतीक बन जाती है।

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में  जाम

वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें  लोणावाला: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में शनिवार तड़के से ही भारी यातायात जाम लगा हुआ था. मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं. यह जाम लगभग नियंत्रित होने ही वाला था कि शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे एक चलती रेनॉल्ट…

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सबसे बड़ा है कौन

सत्ता ,संगठन और राजनेता राजनीति की मुख्य धुरी हैं। कहा जाता है कि अगर इनमें तालमेल है तो सब कुछ ठीक नजर आता है मगर कभी कभी इनमें वर्चस्व की लड़ाई छिड़ जाती है और फिर यह तयः करना मुश्किल होता है कि इन तीनों में से कौन बड़ा है ,सर्वश्रेष्ठ है या किसकी चलती है या किसकी सुनी जा रही है। देखा जाए तो संगठन ही सबसे बड़ा होता है क्योंकि संगठन ही सबको जोड़कर रखता है और संगठन के नीचे ही सब काम करते हैं और संगठन ही निर्णय करता है कि कौन चुनाव लड़ेगा और जीतकर सत्ता में जायेगा और कौन संगठन में काम करेगा। संगठन ही तयः करता है कि कौन राजा बनेगा और कौन मंत्री । इसलिए संगठन और संगठन का मुखिया ही बड़ा होता है। संगठन से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले चारों खाने चित ही दिखाई दिए हैं।

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