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ऐसी फ़ितरत का क्या करेंगे हम ?

ऐसी फ़ितरत का क्या करेंगे हम | दर्द और सवालों से भरी ग़ज़ल

डॉ. नलिनी शर्मा, प्रसिद्ध लेखिका, अहमदाबाद

ऐसी फ़ितरत का क्या करेंगे हम,
तेरी ग़ैरत का क्या करेंगे हम।

काम आए न जो कभी मेरे,
उस हक़ीक़त का क्या करेंगे हम।

वक़्त पर छोड़ कर चली जाए,
उस मुहब्बत का क्या करेंगे हम।

लिख चुका दुख ख़ुदा मेरे हिस्से,
अब इनायत का क्या करेंगे हम।

दास्ताँ ठाठ की सुनाता है,
तेरी शौकत का क्या करेंगे हम।

काम आए न जो कहीं दौलत,
उस वसीयत का क्या करेंगे हम।

साथ मेरे अगर नहीं तू ही,
ऐसी क़िस्मत का क्या करेंगे हम।

जो न पहुँचे मुक़ाम तक अपने,
ऐसी उलफ़त का क्या करेंगे हम।

मुझसे अपने मिले नहीं कृष्णा,
ऐसी फ़ुर्सत का क्या करेंगे हम।

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