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चलता चल राही

कठिन पहाड़ी रास्ते पर आगे बढ़ता यात्री, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक

आकांक्षा सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, जबलपुर

चलता चल राही
पग में
कांटे आयेंगे
डग में
बाधा आएगी
पथ में
बेशक डगर
कठिन होगी
मुश्किलें
प्रतिदिन होंगी
तू फिर भी
चलता चल राही।।

पग में तेरे
कांटे आये
कितना भी
तुझको भरमाए
देख कंटक
जब तू मुस्काए
मुश्किलें
फिर कम होंगी
तू फिर भी
चलता चल राही।।

वीर तू ही है
अधीर नहीं है
संकट जब
खाए पछाड़
तब
निश्चय तेरी
विजय होंगी
तू फिर भी
चलता चल राही।।

विजयी बन
अभिमान न धरना
कर्तव्य तेरा
बस चलते रहना
इक उपलब्धि
जो हाथ लगे तो
तुझको नही
रुकना होगा
तू फिर भी
चलता चल राही।।

मृत्यु जब तक
करे वरण न
जीवन जब तक
थक जाए न
धमनियों में जब तक
रक्त रुके न
सांसे जब तक
टूट जाए न
तू तब तक
चलता चल राही।।
तू तब तक
चलता चल राही।।

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