आजोल यूथ क्लब के क्रिकेट महाकुंभ में उमड़ा जोश
मुंबई के कांदिवली स्थित स्पोर्ट्स अकादमी का माहौल रविवार, 16 नवंबर को सुबह से ही क्रिकेट के रंग में रंग चुका था. अजोल यूथ क्लब द्वारा आयोजित वन-डे लिमिटेड ओवर क्रिकेट टूर्नामेंट ने युवाओं में ऐसा जोश भर दिया कि पूरा मैदान तालियों, शोरगुल और उत्साह के नारों से गूंज उठा. टूर्नामेंट का शानदार आगाज़ मातोश्री उर्मिलाबेन शाह परिवार के हाथों शुभारंभ के साथ हुआ.
अधूरी ख्वाहिश..
गर्मी के एक दोपहर में, सुदीप बनर्जी के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। निधि, जो अपने पति अमितेश के उपेक्षात्मक और हिंसक व्यवहार से वर्षों से जूझ रही है, यह घोषणा करती है कि मुखाग्नि सुदीप का बेटा सुजीत देगा—एक सच्चाई जिसे अब तक कोई नहीं जानता था। विरोध और संदेह के बावजूद, निधि यह साबित करने पर अडिग रहती है कि सुजीत सुदीप का खून है।
सुदीप के गुजरने के बाद, निधि को उसकी एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप मिलती है, जिसमें वह अपनी आखिरी ख्वाहिश व्यक्त करता है—कि निधि उसकी मृत्यु के बाद भी उसके नाम का सिंदूर लगाए और उसकी पत्नी की तरह जीवन बिताए। निधि इस इच्छा को उसी रात पूरी करती है।
कुछ दिन बाद, वकील की उपस्थिति में सुदीप की वसीयत पढ़ी जाती है, जिसमें उसकी सारी संपत्ति निधि और उसके बाद सुजीत के नाम की जाती है, और निधि से कहा जाता है कि वह उसकी विधवा नहीं बल्कि सुहागन की तरह इस घर में रहे। यह सब सुनकर सुदीप की माँ निधि को अपनाती है और अपने पोते को गले लगाती है। यह क्षण एक रिश्ते के खोने के दर्द के साथ-साथ नए अपनत्व और स्वीकृति के सुख को भी दर्शाता है।
एक सूखा गुलाब, हजार एहसास
पुस्तक के पन्नों में दबा एक सूखा गुलाब सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि अनकहे प्यार और मूक संवाद का प्रतीक है। यह कविता उन भावनाओं को शब्द देती है, जिन्हें कभी कहा नहीं जा सका। समय भले ही गुलाब को सुखा देता है, पर उसकी खुशबू और एहसास दिल में हमेशा जीवित रहते हैं। यह रचना हर उस व्यक्ति को छूती है, जिसने कभी खामोशी में भी गहरा प्रेम महसूस किया हो।
जमीन के नीचे दौड़ रही ट्रेन, लेकिन ‘डिजिटल अंधेरे’ में
मुंबई की महत्वाकांक्षी अंडरग्राउंड मेट्रो एक्वा लाइन3 को शुरू हुए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब भी यात्री एक बुनियादी सुविधा से वंचित हैंमोबाइल नेटवर्क. वर्ली से कोलाबा के बीच कई स्टेशन और सुरंगें ऐसी हैं, जहाँ ट्रेन तो निर्बाध दौड़ती है, लेकिन मोबाइल पूरी तरह नो नेटवर्क हो जाता…
चीखती इंसानियत
यह कविता इंसानियत के दर्द, टूटते रिश्तों और बढ़ती नफरत की सच्चाई को उजागर करती है, लेकिन साथ ही करुणा, प्रेम और संवेदना के जरिए बदलाव की उम्मीद भी जगाती है.
खुशनसीब प्रेमिकाएँ…
खुशनसीब प्रेमिकाएँ वो होती हैं जिनके प्रेम में बड़े वादे नहीं, बल्कि छोटी-छोटी सच्ची खुशियाँ होती हैंसुबह की चाय, सम्मान, साथ और एक सुकून भरा रिश्ता। यह कविता सच्चे प्रेम की उसी खूबसूरत सादगी को दर्शाती है।
शून्य सा वज़ूद रखा कीजिए
एक करोड़पति इंसान, जो केवल अपनी कमाई में बढ़ते शून्य और दिखावे की भीड़ में संतुष्टि ढूंढता है, वास्तव में भीतर से सबसे दरिद्र हो सकता है। अमीरी केवल धन से नहीं, बल्कि विनम्रता, आत्म-संयम और नि:स्वार्थ सेवा से मापी जाती है। जो व्यक्ति अपने सामान्य कार्यों को करने में शर्म करता है और केवल दिखावे के लिए दान करता है, उसका अहंकार अंततः उसे अकेला छोड़ देता है। शून्य बनकर रहना सीखिए – जो किसी के साथ जुड़ जाए तो उसकी कीमत बढ़ा देता है, पर स्वयं का कोई घमंड नहीं रखता।
एक पाती मुसाफ़िर के नाम…
जाने से पहले की वह आख़िरी मुलाक़ात जहाँ मौसम, सड़कें, पेड़ और खामोशी तक हमारी बातों के साक्षी बने। मीठी यादों, अनकहे जज़्बातों और एक गलतफ़हमी के बीच खड़ी चुप्पी की दीवार, जो आज भी लौटने से रोकती है।
दशहरा पर्व
दशहरा का पर्व असुरों के विनाश और धर्म की विजय का प्रतीक है। जब रावण का अंत हुआ, तब देवता भयमुक्त होकर उल्लास से दुंदुभियाँ बजाने लगे और अप्सराएँ गान करने लगीं। ऋषि-मुनि अपने जप और ध्यान में और अधिक एकाग्र होकर उन्मुक्त हो उठे। विभीषण को लंका का राज्य देकर भगवान राम अपने वनवास का अंत कर अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने विजयध्वजा फहराई, माता सीता की आरती उतारी और पुष्पों की बौछार की। उस बेला में मिलन और उल्लास का ऐसा वातावरण बना कि नर-नारी आनंद में झूमकर नृत्य करने लगे।
