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ज़िन्दगी पर भावनात्मक हिंदी कविता जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती हुई

ज़िन्दगी

“ज़िन्दगी” एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कविता है जो जीवन के विभिन्न रंगों—खुशी, गम, उम्मीद और संघर्ष—को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है। यह कविता हर पाठक को जीवन के अनुभवों से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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चाँदनी रात में हवा में लहराते लंबे बालों वाली महिला, जिसके आसपास भावनात्मक और रहस्यमयी माहौल है

जुल्फ़ तेरी

तेरी जुल्फ़ों की खुशबू और उनकी नरम छाँव में जैसे मैं खुद को भूलता चला गया। तेरी मौजूदगी में ऐसा सुकून मिला, मानो पूरी कायनात सिमटकर एक एहसास बन गई हो। लेकिन उसी चाँदनी रात में, जब भावनाएँ शब्दों में ढल रही थीं, कुछ ऐसा हुआ कि सारी इबारतें जलकर राख हो गईं। अब बस एक खामोशी, कुछ अधूरे जज़्बात और एक अनकहा सवाल रह गया है, जो आज भी दिल के किसी कोने से मुझे चुपचाप देखता है।

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महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान धर्मसभा को संबोधित करतीं साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी

‘वर्तमान ही वास्तविक जीवन है : डॉ. अमृतरसा श्रीजी

महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि भूतकाल एक सपना और भविष्य एक कल्पना है, जबकि वर्तमान ही वास्तविक जीवन है। धर्मसभा में तपस्वियों की प्रभावना और साधार्मिक भक्ति के आयोजन भी हुए।

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दो सच्चे मित्र कठिन समय में एक-दूसरे का हाथ थामे हुए

अमर मित्रता

मित्रता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, त्याग और समर्पण का सबसे सुंदर रूप है। सच्चा मित्र वही होता है, जो हर सुख-दुःख में बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा रहे। यह लेख मित्रता के वास्तविक महत्व और उसके जीवन में अमूल्य स्थान को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।

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मुंशी प्रेमचंद का साहित्यिक चित्र, हाथ में कलम और पुस्तकों के साथ हिंदी साहित्य को समर्पित भावपूर्ण दृश्य

साहित्य-सूर्य : प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे महान कथाकार थे, जिनकी कलम ने गरीब, किसान और आम इंसान के जीवन को आवाज़ दी। प्रस्तुत कविता उनके साहित्यिक योगदान को नमन करती है।

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…जब एक अफवाह ने हिला दिया था महू को

27 साल पहले महू के सात रास्ता स्कूल में एक टाइम बम मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया था। संसाधनों की कमी और अफरा-तफरी के बीच प्रशासन, पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने जिस सूझबूझ से हालात को संभाला, वह आज भी यादगार बन गया है। घटना से जुड़े तत्कालीन अधिकारी आज भी इसे याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

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“मोहल्ले में पुलिस के आने पर इकट्ठा भीड़ और हैरान पड़ोसी, हास्यपूर्ण स्थिति”

किरायेदार

यह एक हास्यपूर्ण कहानी है जिसमें पड़ोसन फोन पर सुनी अधूरी बात के आधार पर खून का शक कर पुलिस बुला लेती है, लेकिन अंत में सच्चाई सामने आने पर पूरा मामला मजाक बन जाता है।

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महंगाई से परेशान आम आदमी और बढ़ती कीमतों का प्रतीकात्मक दृश्य

बढ़ती महंगाई

यह कविता नारद जी और महंगाई के संवाद के माध्यम से समाज की विडंबना को उजागर करती है। महंगाई खुद को निर्दोष बताती है और असली जिम्मेदारी सत्ता और व्यवस्था पर डालती है जो इस व्यंग्य को और भी प्रभावशाली बनाता है।

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