ख़ामोश प्रेम-पत्र
शब्दों से परे प्रेम की एक कोमल अनुभूति “ख़ामोश प्रेम-पत्र” उस भावना को बयान करती है, जहाँ लिखना नहीं, महसूस करना ही प्रेम है।
जुल्फ़ तेरी
तेरी जुल्फ़ों की खुशबू और उनकी नरम छाँव में जैसे मैं खुद को भूलता चला गया। तेरी मौजूदगी में ऐसा सुकून मिला, मानो पूरी कायनात सिमटकर एक एहसास बन गई हो। लेकिन उसी चाँदनी रात में, जब भावनाएँ शब्दों में ढल रही थीं, कुछ ऐसा हुआ कि सारी इबारतें जलकर राख हो गईं। अब बस एक खामोशी, कुछ अधूरे जज़्बात और एक अनकहा सवाल रह गया है, जो आज भी दिल के किसी कोने से मुझे चुपचाप देखता है।
‘वर्तमान ही वास्तविक जीवन है : डॉ. अमृतरसा श्रीजी
महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि भूतकाल एक सपना और भविष्य एक कल्पना है, जबकि वर्तमान ही वास्तविक जीवन है। धर्मसभा में तपस्वियों की प्रभावना और साधार्मिक भक्ति के आयोजन भी हुए।
अमर मित्रता
मित्रता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, त्याग और समर्पण का सबसे सुंदर रूप है। सच्चा मित्र वही होता है, जो हर सुख-दुःख में बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा रहे। यह लेख मित्रता के वास्तविक महत्व और उसके जीवन में अमूल्य स्थान को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।
साहित्य-सूर्य : प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे महान कथाकार थे, जिनकी कलम ने गरीब, किसान और आम इंसान के जीवन को आवाज़ दी। प्रस्तुत कविता उनके साहित्यिक योगदान को नमन करती है।
कहाँ गए वो दिन
पैसा कम था, पर अपनापन भरपूर था। गली-मुहल्ले रिश्तों से भरे थे, और मुस्कानें दिखावे से नहीं, दिल से उपजती थीं।
…जब एक अफवाह ने हिला दिया था महू को
27 साल पहले महू के सात रास्ता स्कूल में एक टाइम बम मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया था। संसाधनों की कमी और अफरा-तफरी के बीच प्रशासन, पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने जिस सूझबूझ से हालात को संभाला, वह आज भी यादगार बन गया है। घटना से जुड़े तत्कालीन अधिकारी आज भी इसे याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
बढ़ती महंगाई
यह कविता नारद जी और महंगाई के संवाद के माध्यम से समाज की विडंबना को उजागर करती है। महंगाई खुद को निर्दोष बताती है और असली जिम्मेदारी सत्ता और व्यवस्था पर डालती है जो इस व्यंग्य को और भी प्रभावशाली बनाता है।
