अभिव्यंजना…
यह कविता शब्दों की मर्यादा, मनकही अभिव्यक्तियों और स्मृतियों के माध्यम से प्रेम, प्रतीक्षा और चेतना के भावों को कोमलता से रचती है।

यह कविता शब्दों की मर्यादा, मनकही अभिव्यक्तियों और स्मृतियों के माध्यम से प्रेम, प्रतीक्षा और चेतना के भावों को कोमलता से रचती है।
भारत के अंतरिक्ष सफर की कहानी राकेश शर्मा से शुरू होकर शुभांशु शुक्ला तक गर्व और आत्मसम्मान की एक नई इबारत लिखती है। बचपन की यादों में बसे राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा ने देशवासियों को फिर से गौरवान्वित किया है। यह सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व, प्रेरणा और आत्मबल का प्रतीक बन गई है।
‘मेरा अनुरागी मन’ आत्मप्रेम, अनुराग और जीवन में प्रेम के पुनर्जागरण की एक संवेदनशील कविता है। इसमें वैराग्य से श्रृंगार तक की भावयात्रा, बसंत की तरह लौटती मुस्कान और भीतर बसे दिव्य प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया है।
“मैं ही उजाला, मैं ही अँधेरा हूँ, मैं ही ख़ुशी, मैं ही दुःख हूँ…”जब इंसान खुद को पूरी तरह स्वीकार कर लेता है,तो उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रह जाती. वह खुद में ही एक पूरी दुनिया बन जाता है।
माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।
दयानंद कला महाविद्यालय में 22 कॉलेजों के 260 प्रतिभागियों ने बिखेरा हुनर संगीता लाहोटी ने किया भव्य उद्घाटन, विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार लातूर से डॉ. मीना घूमे की रिपोर्ट लातूर : यहां की सुप्रसिद्ध दयानंद शिक्षण संस्था के दयानंद कला महाविद्यालय, लातूर के फैशन एवं ड्रेस डिजाइन विभाग द्वारा भव्य ‘फ्यूजन 2026’ राज्य स्तरीय…
हल्की बारिश, चाय की महक और प्रेम से भरी एक शांत शाम. राघव और रिद्धिमा के बीच शब्दों से परे एक ऐसा रिश्ता है, जहाँ विश्वास, अपनापन और आत्माओं का मिलन प्रेम को एक नए अर्थ में बदल देता है. यह कहानी दो दिलों की उस रात की दास्तान है, जब प्रेम कविता नहीं, बल्कि घर बन गया.
श्रीमती शकुंतला बोहरा के नेत्रदान ने शोक की घड़ी को मानवता के उजाले में बदल दिया। यह भावुक कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार ने अपने निजी दुःख को दो अनजान ज़िंदगियों की रोशनी बना दिया और समाज के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।
बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।
ओशो के डिस्कोर्स से औरत सेक्स में बहुत अधिक रुचि नहीं रखती। वह गर्माहट, गले लगाने, मित्रता और प्रेम में ज़्यादा रुचि रखती है। पुरुष अधिकतर सेक्स में रुचि रखते हैं। ये गलतफहमियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि शायद भगवान ने दुनिया नहीं बनाई होगी — क्योंकि यहाँ कुछ भी मेल नहीं खाता। ऐसा…