माँ का आगमन
“माँ के आगमन का पैगाम” एक सुंदर और भावपूर्ण भक्ति कविता है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के आगमन की खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करती है। इस कविता में प्रकृति और मानव जीवन के बीच के उस गहरे संबंध को दर्शाया गया है, जो माँ के आगमन के साथ नवजीवन और उत्साह से भर उठता है।
सुनो पलाश …
हर साल फरवरी में पलाश जब अनंत से उतरकर मेरे छत की मुंडेर तक खिल जाता था, तब कुछ भीतर गुनगुनाने लगता था। ज्वालामुखी से दहकते फूलों की गरमी मेरी उँगलियों तक दौड़ जाती थी। किताबें बेअसर हो जाती थीं, मन मुंडेर पर टिक जाता था, और अम्मा की डांट भी उस खींचाव को रोक नहीं पाती थी। तब नीले स्कर्ट की सुनहरी किनारी घुटनों तक फहराती थी और गालों पर सिंदूरी रंग अपनी पहली होली खेलने लगता था। साल दर साल फरवरी आती रही, लेकिन आज कपोल रक्तहीन हो गए, स्कर्ट बीते दिनों की बात बन गई, और अम्मा की डांट एक स्मृति। लेकिन मन अब भी चाहता है कि पलाश लौटे, फिर एक बार मुंडेर तक झुके, फिर से होरी से पहले होली खेली जाए।
सुनहरी ढलती सांझ
ढलती सांझ, खामोश हवा और डूबते सूरज की किरणों में किसी अपने की याद. ‘सुनहरी ढलती सांझ’ प्रेम, विरह और इंतज़ार की भावनाओं को शब्द देती खूबसूरत कविता है.
टीआई मदन सिंह पंवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश की
महिदपुर रोड में टीआई मदन सिंह पंवार ने श्मशान समिति को ₹51,000 की दान राशि देकर समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उनके इस कदम से न केवल विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।
मेहनत की खुशबू से महका कारवाँ
बच्चों की मेहनत, प्रतिभा और सफलता जब गुरु के आशीष से जुड़ती है, तो हर उपलब्धि खास बन जाती है। सिद्धि के गीत, वैष्णवी का अभिनय, कियरा का नृत्य और आराध्या की चित्रकला को समर्पित यह कविता बच्चों के सपनों और उनकी जीत का उत्सव है।
“मुरली की धुन”
राधा-कृष्ण का प्रेम केवल सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और त्याग का प्रतीक माना जाता है। ‘मुरली की धुन’ इसी अमर प्रेम की एक भावुक कथा है, जिसमें कृष्ण अपनी राधा से किया वचन निभाने के लिए उनके जीवन के अंतिम क्षणों में लौटकर आते हैं।
उखड़ने के बाद भी ना हारा… देखिए इस पीपल की जिद!
जड़ों से उखाड़े जाने के बाद भी मुस्कुराना कैसे संभव है, यह सांवेर रोड की पहाड़ी पर लगाए गए पीपल के तने से सीखा जा सकता है। बिना शाखाओं के रहकर भी उसने हरियाली का संदेश दिया है। नगर निगम की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण बचाने की मिसाल है, बल्कि पेड़ ट्रांसप्लांटेशन की एक प्रेरणादायक कहानी भी है।
अजब दौर है…
नमिता गुप्ता, लखनऊ (उ.प्र) ” सरल बेटा, क्या हाल है तुम्हारा।”मैं ठीक हूँ दादाजी । अभी मै कालेज में हूँ। टेक केयर दादा जी… मैं फोन रखता हूँ।”विजय ने अपने मित्र को फोन मिलाया “हेलो!! गगन तू कैसा है ?”“यार ,मैं ठीक हूँ, तू अपनी बता।”” क्पा बताऊ यार,बुढ़ापे में जोड़ों में दर्द रहता है।…
माँ का रसोईघर
माँ चूल्हे की आँच में तपकर जीवन को महकाती है। आटे की लोई में वह अपने सपनों को गूँथती और बेलती है। दिनभर की थकान उसके चेहरे से तब गायब हो जाती है जब थाली में पकवानों की खुशबू फैलती है और परिवार का हर सदस्य संतोष से भोजन करता है। बच्चों की चमकती आँखों में उसे अपनी सबसे बड़ी तृप्ति मिलती है।
उसके लिए खाना सिर्फ शरीर का ईंधन नहीं है, बल्कि घर का प्रेम है, जिससे परिवार जीवित और आनंदित रहता है। उसकी रसोई एक तपोवन है, जहाँ वह हर दिन निस्वार्थ भाव से यज्ञ करती है
