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टूटे दिल वाली स्त्री खामोशी से अंधेरे कमरे में बैठी हुई, आंखों में दर्द और विश्वासघात का भाव

मेरा संसार

यह कविता एक ऐसे टूटे हुए मन की आवाज़ है, जिसने अपने पूरे संसार को एक ही व्यक्ति में समेट लिया था. भरोसे, प्रेम और समर्पण के बदले उसे झूठ, छल और दर्द मिला. यह रचना विश्वास के टूटने से उपजे आंतरिक संघर्ष, पीड़ा और आत्मबोध को बेहद मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है

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शिव से हो जाओ तुम..

जो खोना नही चाहते रिश्तों को जहर के घूंट पी के भी, मुस्कुराओ तुम, शिव से हो जाओ तुम.. दो बोल भी मीठे ना मिले किसी रिश्ते में, कोई गम नही, तपती झुलसती बातें भुला के प्यार की बरसात कर जाओ तुम शिव से हो जाओ तुम…. बड़े भी चाहे तुम्हें, बच्चे भी बतियाये, तुमसे…

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जब चिड़िया चुग गई खेत !

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में आगे बढ़ते हुए विनोद ने सफलता तो पा ली, लेकिन रिश्तों को समय देना भूल गया। करवाचौथ के दिन एक गजरा उसे एहसास दिला देता है कि प्यार बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटे पलों में छिपा होता है जिन्हें वह हमेशा टालता रहा। जब समझ आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

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राधाकृष्णन की रोशनी में आज का अँधेरा पढ़ना

आज हम शिक्षक दिवस मनाते हैं—पर यह महज़ कैलेंडर की औपचारिक तारीख़ नहीं, एक विचार की परीक्षा है। इस दिन का अर्थ तभी पूरा होता है जब हम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को किताबों के अध्याय से बाहर निकालकर अपने समय की नब्ज़ पर रख दें। वे केवल दार्शनिक, कुलपति या भारत के दूसरे राष्ट्रपति नहीं…

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हिंदी दिवस

यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि हमारी भावनाएँ, प्रेम, ज्ञान और भक्ति—सभी हिंदी में अभिव्यक्त होती हैं। पहले शब्दों से लेकर वेद, उपनिषद और गीता तक, पूजा-अर्चना और भजन तक, हिंदी भाषा हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी दिवस का यह संदेश हमें अपनी मातृभाषा को पढ़ने, लिखने और अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

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घर की रसोई में साथ खाना बनाते और मुस्कुराते आधुनिक भारतीय कपल, साझा जिम्मेदारियों और कोरमांस की भावना को दर्शाता दृश्य।

रोमांस का बदला हुआ मतलब ” कोरमांस”

आज के दौर में प्यार अब केवल कैंडललाइट डिनर और बड़े सरप्राइज़ तक सीमित नहीं रहा। साझा ज़िम्मेदारियों, रोज़मर्रा के कामों और एक-दूसरे का साथ निभाने में पनपता यह नया ट्रेंड कोरमांस आधुनिक रिश्तों को एक नई, टिकाऊ परिभाषा दे रहा है।

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शिव पार्वती का दिव्य मिलन दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता, तप और समर्पण का प्रतीक

आत्मा का समर्पण

हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।

कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।

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रात में फोन पर बात करते राघव और रिद्धिमा, जिनके चेहरों पर प्रेम और अपनापन झलक रहा है

तुम्हारा बाय कहना मुझे अच्छा नहीं लगता..

“तुम्हारा ‘बाय’ कहना मुझे अच्छा नहीं लगता” राघव और रिद्धिमा की एक बेहद भावुक प्रेम कहानी है। इसमें दिखाया गया है कि रिश्तों की गहराई बड़े वादों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे शब्दों और उनके पीछे छिपे एहसासों में होती है। रिद्धिमा के लिए “बाय” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि बिछड़ने का एहसास है, जबकि राघव उसके भावों को समझकर अपनी विदाई का अंदाज़ बदल देता है। यह कहानी प्रेम, अपनापन और अगली मुलाकात की उम्मीद को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।

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अक्षय तृतीया पर सेवा का अनोखा उदाहरण

अक्षय तृतीया पर सेवा, संस्कार और उत्सव का संगम

कांठेड़ परिवार ने अक्षय तृतीया पर गौशाला में सेवा कर जन्मदिन और व्यवसाय की वर्षगांठ को खास अंदाज में मनाकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया।

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टूटी हुई कठपुतली की डोरियों के साथ आत्मविश्वास से खड़ी एक भारतीय महिला, जिसके चेहरे पर आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और नई शुरुआत का भाव झलक रहा है। पृष्ठभूमि में अंधकार से उजाले की ओर जाता दृश्य नारी सशक्तिकरण और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक है।

कठपुतली

‘कठपुतली’ एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है, जो स्त्री को केवल रिश्तों या सामाजिक बंधनों तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे सृजन, चेतना, आत्मसम्मान और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक मानती है। कविता यह संदेश देती है कि स्त्री किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि अपने जीवन की स्वयं निर्माता है। संवेदनशील शब्दों और सशक्त भावों से सजी यह रचना नारी सम्मान, समानता और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती है।

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