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14 घंटे की मेहनत, फिर भी चेहरे पर मुस्कान

अनदेखी नायिका: लक्ष्मी भोइर

यह कहानी है पालघर की लक्ष्मी गोपाल भोइर की, जो पिछले 30 वर्षों से हर दिन सुबह 2 बजे उठकर मंडी से ताज़ी सब्ज़ियाँ लाती हैं और मुंबई में बेचती हैं। 14 घंटे की कड़ी मेहनत के बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान और दिल में संतोष है। यह लेख उन अनदेखी महिलाओं की मेहनत और आत्मसम्मान को उजागर करता है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। जानिए एक साधारण दिखने वाली महिला की असाधारण जीवन यात्रा।

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कृष्ण और कृष्ण प्रिया

वह स्वयं को हर रूप में देखता है वामन, नरसिंह, माधव, नंदलाल एक ही सत्ता, अनेक लीलाएँ। और उसके सामने खड़ी है ‘कृष्ण प्रिया’, जिसकी पहचान केवल उसकी भक्ति है। ग्वालिन के वेश में, आँखों में प्रेम और अधरों पर पुकार लिए, वह बस इतना चाहती है कि कृष्ण नाम में खो जाए। उसके लिए वही तिलक है, वही श्रृंगार, वही जीवन। अंत में उसकी एक ही विनती रह जाती है. “जब मैं कहूँ… आओ न स्वामी, तो तुम आ जाना।”

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चाँदनी रात में खिड़की के पास चिंतन में बैठी एक महिला के सामने स्वप्न में प्रकट हुआ एक प्राचीन भारतीय बादशाह, जिसकी शांत मुद्रा अतीत से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती है।

गुज़ारिश

‘गुज़ारिश’ एक गहन चिंतनशील कविता है, जिसमें स्वप्न में आए एक गुज़रे दौर के बादशाह के माध्यम से अतीत, इतिहास, समय और वर्तमान पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया गया है। कविता यह संदेश देती है कि बीते समय की गलतियों में उलझकर वर्तमान और भविष्य को नहीं खोना चाहिए। कर्म, सकारात्मक सोच और बदलते समय के साथ आगे बढ़ने का संदेश देने वाली यह रचना पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है

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आक्रोश और बेचैनी को शब्दों में व्यक्त करती हुई कलम और हिंदी कविता

एक दिन यूं ही !!

जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.

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एक हरे-भरे पार्क में भावुक आलिंगन का दृश्य, जहां एक युवा दंपति, एक मां और उसका बेटा तथा दो मित्र एक-दूसरे को गले लगाकर प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास कर रहे हैं।

आलिंगन की ताकत

कभी-कभी एक सच्चा आलिंगन वह सब कह देता है, जो हजारों शब्द नहीं कह पाते। गले लगाना केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास भी है। जानिए क्यों एक छोटा-सा आलिंगन रिश्तों में बड़ी खुशियां ला सकता है।

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नागपुर रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ती एक महिला फेंसिंग खिलाड़ी को बचाता नीली जर्सी पहने खिलाड़ी का भावनात्मक दृश्य।

“गोल्ड मेडल, ट्रेन और एक नीली जर्सी”

गोल्ड मेडल जीतने की खुशी पलभर में मौत के साए में बदल गई। नागपुर स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय एक विपक्षी खिलाड़ी ने अपनी तत्परता से मेरी जान बचा ली। यह संस्मरण केवल खेल की नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चे कोच और जीवन के अनमोल सबक की कहानी है।

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बचपन को बाँहों में भर लो…

बच्चे रंग, खुशबू और उम्मीदों से भरे उस चमन के फूल हैं जिनकी नर्म हथेलियों पर उनकी पूरी तकदीर लिखी होती है। कहीं धूल-भरी मुट्ठियाँ हैं, कहीं हँसी से भरा बालपन और कहीं वही बचपन घरों में कैद होकर बहेलियों की निगाहों से डरता है। उनके मस्तक वात्सल्य से भीगने के लिए बने हैं, न कि भय से काँपने के लिए। पर सच यह है कि कुछ बच्चे शिक्षा के मंदिरों में बैठते हैं, जबकि कुछ बाहर मायूस खड़े रह जाते हैं.

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मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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ना झुकती, ना रुकती — मैं नारी हूं

मैं नारी हूं। गलतियां करती हूं, पर उन्हें दोहराती नहीं। गलती से सबक लेकर आगे बढ़ना जानती हूं। सीमाओं में रहकर भी सफलता को गले लगाना चाहती हूं। अपनी लक्ष्मण रेखा स्वयं तय करती हूं, जिसे कोई लांघकर अंदर नहीं आ सकता और कोई बहरूपिया मुझे रेखा पार ले जा नहीं सकता। मैं उन्नति के शिखर को छूना चाहती हूं, पर अपने दायरों में रहकर। किसी को कुचलकर आगे बढ़ना या किसी समझौते के कारण झुकना नहीं चाहती। सफलता न मिले तो भी मंज़ूर है, लेकिन अपने किरदार को गिराना नहीं चाहती। अगर मेरे परिवार को बुरी नज़रें छू जाएं, तो काली दुर्गा बनने में मुझे देर नहीं लगती। ज़रूरत पड़े तो कंधे से कंधा मिलाने में कभी नहीं कतराती। मुझे बराबरी का दर्जा मिले या न मिले, पर मेरी शान इससे कभी घटती नहीं।

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महिदपुर रोड श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करती पूज्य साध्वी चारित्र कलाश्री जी महाराज साहब

एकमात्र जिन शासन ही सच्ची राह दिखाता है

महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी चारित्र कलाश्री जी म.सा. ने जिन शासन को जीवन की सच्ची राह बताते हुए भगवान महावीर की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।

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