
मधु झुनझुनवाला, प्रसिद्ध लेखिका,जयपुर
हिंदी हमारी भाषा, सहज अभिव्यक्ति जिसकी,
है समृद्ध शब्दों से, संस्कृत से व्युत्पत्ति इसकी।
हिंदी अलंकृत सौंदर्य, भाव और अभिव्यंजना से,
हम सब भारतीय करते हैं वंदन, हृदय रंजना से।
हिंदी माँ के आँचल सी देती हमेशा शीतल छाँव,
हर्षाए अंतस को अनुभूतियाँ, वाणी पाए ठाँव।
हिंदी है तुलसी, मीरा, कबीर, जायसी की वाणी,
हिंदी छंद, अलंकार, चौपाई, दोहों की गुणखानी।
हिंदी शोभित भाल पे मानिनी सी, दमके दामिनी,
हिंदी गंगा सी पावन, जनमानस में बहे तरंगिनी।
हो पल्लवित, रहे सुवासित हिंदी साहित्य उपवन,
हिंदी के माधुर्य अमृत से भरे भारतीय कण-कण।

धन्यवाद रचना को पटल पर प्रेषित करने के लिए 🙏🏻
Khoobsurat likha hai. 💐